रूस का बड़ा फैसला: INF संधि से बाहर, NATO पर लगाए गंभीर आरोप
मध्यम दूरी की परमाणु संधि से रूस के अलग होने से बढ़ा वैश्विक तनाव, क्या शुरू होगी नई हथियारों की होड़?
- रूस ने दशकों पुरानी INF (Intermediate-Range Nuclear Forces) संधि से खुद को अलग करने का ऐलान किया है।
- रूस ने इस फैसले के लिए सीधे तौर पर नाटो (NATO) और अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है, उन पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया।
- इस कदम से वैश्विक तनाव बढ़ गया है और दुनिया में एक नई हथियारों की होड़ शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 5 अगस्त, 2025 – वैश्विक सुरक्षा और परमाणु हथियारों के नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण संधि, इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस (INF) संधि, से रूस ने खुद को बाहर कर लिया है। इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही रूस ने पश्चिमी देशों के सैन्य गठबंधन नाटो (NATO) पर इस संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर पहले से ही तनाव चरम पर है। रूस के इस कदम को अमेरिका और यूरोप के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है, जिससे वैश्विक सुरक्षा का संतुलन बिगड़ सकता है।
क्या है INF संधि और रूस का आरोप?
INF संधि पर 1987 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत संघ के नेता मिखाइल गोर्बाचेव ने हस्ताक्षर किए थे। इसका मुख्य उद्देश्य 500 से 5,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली जमीन से लॉन्च होने वाली क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन और तैनाती को रोकना था। इस संधि ने शीत युद्ध के दौरान यूरोप को परमाणु युद्ध के खतरे से सुरक्षित रखने में मदद की थी।
रूस का आरोप है कि नाटो देश लगातार इस संधि का उल्लंघन कर रहे हैं। रूस ने दावा किया है कि अमेरिका अपनी परमाणु पनडुब्बियों को रूसी सीमाओं के करीब तैनात करके और मिसाइल रक्षा प्रणालियों के नाम पर यूरोप में ऐसे हथियार तैनात करके संधि का उल्लंघन कर रहा है, जो रूस के लिए सीधा खतरा हैं।
क्यों महत्वपूर्ण थी यह संधि?
INF संधि का महत्व सिर्फ मिसाइलों की संख्या को सीमित करने तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसने अमेरिका और रूस के बीच विश्वास को भी बढ़ाया था। इसने हथियारों की एक पूरी श्रेणी को समाप्त कर दिया था, जिससे दोनों महाशक्तियों के बीच सीधा टकराव टल गया था। इस संधि के खत्म होने के बाद अब दोनों देश मध्यम दूरी की मिसाइलों को फिर से बनाना और तैनात करना शुरू कर सकते हैं। यह कदम यूरोप की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है और परमाणु हथियारों की एक नई दौड़ को जन्म दे सकता है।
रूस के फैसले के वैश्विक परिणाम
रूस का INF संधि से बाहर होना सिर्फ एक द्विपक्षीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके वैश्विक परिणाम हो सकते हैं।
नई हथियारों की होड़: इस कदम से रूस और अमेरिका दोनों को बिना किसी रोक-टोक के मध्यम दूरी की मिसाइलें बनाने की छूट मिल जाएगी, जिससे नई हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है।
यूरोप में तनाव: रूस के इस फैसले के बाद यूरोप में अमेरिका द्वारा मिसाइलें तैनात करने की संभावना बढ़ जाएगी, जिससे रूस और नाटो के बीच तनाव और गहरा सकता है।
चीन की भूमिका: इस संधि में चीन कभी शामिल नहीं था। अब जब रूस और अमेरिका भी इससे बाहर हैं, तो चीन अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार करने के लिए और स्वतंत्र हो जाएगा, जिससे एशिया में भी अस्थिरता पैदा हो सकती है।