लेबर पार्टी में भूचाल:डेविड लैमी बने ब्रिटेन के नए उप प्रधानमंत्री
एंजेला रेनर के इस्तीफे के बाद नए उप प्रधानमंत्री
पूनम शर्मा
ब्रिटेन की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। लेबर पार्टी की वरिष्ठ नेता और उप प्रधानमंत्री एंजेला रेनर ने कर घोटाले के आरोपों के चलते इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह विदेश मंत्री डेविड लैमी को नया उप प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार पहले ही संकटों से जूझ रही है और लेबर पार्टी विपक्षी दलों तथा दक्षिणपंथी ताकतों के दबाव में है।
कर घोटाले ने छीनी रेनर की कुर्सी
रेनर ने हाल ही में स्वीकार किया कि उन्होंने दक्षिण इंग्लैंड में स्थित अपने फ्लैट पर कम स्टाम्प ड्यूटी टैक्स चुकाया था। इसके अलावा, उन पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने एक अन्य संपत्ति के दस्तावेज़ों से अपना नाम हटाकर लगभग 40,000 पाउंड की कर बचत की थी। हालांकि नैतिकता प्रमुख लॉरी मैग्नस ने इस मामले को “जटिल” करार दिया और कहा कि रेनर को कुछ सलाह दी गई थी, लेकिन विशेषज्ञ कर सलाह न लेने के कारण उनका आचरण उच्चतम मानकों पर खरा नहीं उतरा।
रेनर ने प्रधानमंत्री स्टारमर को भेजे इस्तीफे के पत्र में माना कि वह “उच्चतम मानकों” पर खरी नहीं उतरीं और इस गलती की पूरी ज़िम्मेदारी लेते हुए आवास मंत्री और उप-प्रधानमंत्री दोनों पदों से हट रही हैं।
पार्टी में उथल-पुथल
रेनर को लेबर पार्टी में वामपंथी धड़े का प्रतीक और भविष्य की संभावित नेता माना जाता था। उनका जाना न केवल स्टारमर के लिए राजनीतिक झटका है बल्कि पार्टी के श्रमिक वर्ग के साथ गहरे रिश्तों को भी कमजोर करता है। अल-जजीरा के संवाददाता जोना हल के मुताबिक, “स्टारमर ने संभवतः लेबर पार्टी के श्रमिक वर्ग की जड़ों से सबसे करीबी संबंध खो दिया है।”
इस घटनाक्रम का असर लेबर पार्टी की साख पर भी पड़ा है, जो पहले से ही आगामी राष्ट्रीय चुनावों में निगेल फरेज की रिफॉर्म यूके पार्टी से पीछे चल रही है। ब्रिटेन में हाल के दिनों में बढ़ती महंगाई और आव्रजन विरोधी प्रदर्शनों ने लेबर सरकार की लोकप्रियता को और कमजोर किया है।
डेविड लैमी की पदोन्नति
डेविड लैमी, जो अब तक विदेश मंत्री थे, को उप प्रधानमंत्री पद सौंपा गया है। साथ ही वे न्याय सचिव की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। लैमी लंबे समय से लेबर पार्टी के वरिष्ठ चेहरे माने जाते हैं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उनकी पकड़ मजबूत है। उनकी नियुक्ति को पार्टी में स्थिरता लाने और सरकार की साख बचाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
स्टारमर के इस बड़े फेरबदल में कई और बदलाव भी हुए।
यवेट कूपर को गृह मंत्रालय से हटाकर विदेश मंत्री बना दिया गया है।
शबाना महमूद अब नई गृह सचिव होंगी।
हाउस ऑफ कॉमन्स की नेता लूसी पॉवेल और स्कॉटलैंड सचिव इयान मरे ने भी सरकार छोड़ने की घोषणा की है।
लेबर सरकार पर संकट
स्टारमर ने जुलाई 2024 में सत्ता संभाली थी, लेकिन तब से उनकी सरकार कई मुश्किलों से गुजर चुकी है। आर्थिक मंदी, आव्रजन विरोधी प्रदर्शनों और आंतरिक विवादों ने सरकार की छवि को कमजोर किया है।
रेनर का इस्तीफा इस संकट को और गहरा कर गया है। वह बचपन से गरीबी में पली-बढ़ीं और किशोरावस्था में ही एकल मां बन गई थीं। यूनियन प्रतिनिधि के रूप में सक्रिय रहते हुए उन्होंने लेबर पार्टी में खास पहचान बनाई। यही वजह थी कि उन्हें दक्षिणपंथी मीडिया और कंजर्वेटिव विरोधियों का लगातार निशाना बनना पड़ा।
आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डेविड लैमी की पदोन्नति से सरकार को अल्पकालिक राहत तो मिल सकती है, लेकिन लेबर पार्टी के भीतर विचारधारात्मक खींचतान और जनता की बढ़ती नाराज़गी बड़े खतरे बने रहेंगे।
लंदन से रिपोर्टिंग करते हुए अल-जजीरा के रोरी चैलैंड्स ने सवाल उठाया कि क्या स्टारमर जनता का भरोसा दोबारा जीत पाएंगे। उनके मुताबिक, “ब्रिटेन के मतदाता मुख्यधारा की लेबर और कंजर्वेटिव पार्टियों से नाखुश हैं और वे निगेल फरेज की रिफॉर्म यूके पार्टी के आकर्षक दक्षिणपंथी लोकलुभावनवाद की ओर देख रहे हैं।”
निष्कर्ष
एंजेला रेनर का इस्तीफा और डेविड लैमी की नियुक्ति लेबर पार्टी के लिए एक निर्णायक मोड़ है। यह बदलाव न केवल पार्टी की आंतरिक राजनीति बल्कि ब्रिटेन की सत्ता संतुलन पर भी गहरा असर डाल सकता है। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्टारमर और उनकी नई टीम इस संकट से उबरकर जनता का विश्वास फिर से हासिल कर पाते हैं या नहीं।