तमिलनाडु में डीएमके की राजनीति और अलगाववादी सोच : निर्मला सीतारमण का तीखा प्रहार

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पूनम शर्मा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके (DMK) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि डीएमके सरकार जनता के असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भावनात्मक और अलगाववादी (सेपरेटिस्ट) राजनीति कर रही है। उनके अनुसार डीएमके बार-बार भाषा, द्रविड़ अस्मिता और उत्तर–दक्षिण विभाजन जैसे मुद्दों को उछालकर भाजपा को निशाना बनाने की कोशिश करती है, जबकि उसके पास भ्रष्टाचार और जातिगत अपराधों के आरोपों का कोई ठोस जवाब नहीं है।

“सबसे बड़ा झूठा तर्क” – निर्मला सीतारमण

पीटीआई को दिए इंटरव्यू में निर्मला सीतारमण ने कहा कि “बीजेपी द्रविड़ हितों के खिलाफ है” यह दावा “सबसे बड़ा झूठा तर्क” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा पूरे भारत के लोगों की भलाई और समान अधिकारों के लिए काम करती है। द्रविड़ पहचान या भाषा के आधार पर अलगाववाद को भड़काना राजनीतिक लाभ का साधन है, लेकिन यह जनता के वास्तविक मुद्दों को हल नहीं करता।

डीएमके पर गंभीर आरोप

निर्मला सीतारमण ने डीएमके सरकार पर कई मोर्चों पर विफल रहने के आरोप लगाए।

भ्रष्टाचार : उन्होंने कहा कि डीएमके के मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन पार्टी इन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही।

महिलाओं के खिलाफ अपराध : राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं, लेकिन सरकार ठोस कदम नहीं उठा पा रही।

जातिगत हिंसा : खासकर दलितों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव के मामलों में वृद्धि हुई है।

नशे की लत : तमिलनाडु में ड्रग्स और नशे का चलन बढ़ रहा है, लेकिन सरकार इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पाई है।

उनके अनुसार डीएमके का ध्यान इन गंभीर समस्याओं से हटकर अलगाववादी भाषण देने में ज़्यादा है।

कर और क्षेत्रीय असमानता के आरोप

सीतारमण ने डीएमके नेताओं द्वारा दिए गए उन बयानों की आलोचना की जिसमें कहा गया कि “हमारा टैक्स बिहार चला जाता है।” उन्होंने कहा कि यह सोच संघीय ढांचे और राष्ट्रीय एकता के खिलाफ है। भारत का संविधान राज्यों के बीच कर संग्रह और वितरण की स्पष्ट व्यवस्था देता है। तमिलनाडु सहित सभी राज्य एक साझा राजकोषीय ढांचे के अंतर्गत आते हैं। इस पर राजनीति करना जनता को गुमराह करना है।

“अलगाववाद” बनाम “संघीय ढांचा”

निर्मला सीतारमण के बयान इस मायने में महत्वपूर्ण हैं कि तमिलनाडु लंबे समय से द्रविड़ आंदोलन और क्षेत्रीय स्वायत्तता के लिए राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है। डीएमके जैसी पार्टियाँ राज्य की पहचान और भाषा को अपने राजनीतिक आधार के रूप में इस्तेमाल करती हैं। लेकिन भाजपा और केंद्र सरकार का तर्क है कि यह पहचान राजनीति विकास को बाधित कर रही है।
सीतारमण ने कहा कि भाजपा का दृष्टिकोण क्षेत्रीय संतुलन और पूरे देश के समान विकास पर है, जबकि डीएमके “बाँटो और शासन करो” की नीति पर चल रही है।

जनता के मुद्दे और राजनीतिक रणनीति

विश्लेषकों के अनुसार डीएमके पर यह हमला तमिलनाडु की राजनीति में भाजपा के लिए एक नई रणनीति का हिस्सा है। भाजपा ने अब सीधे डीएमके के गढ़ को चुनौती देना शुरू किया है। निर्मला सीतारमण का बयान इस बात का संकेत है कि भाजपा भ्रष्टाचार, जातिगत हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे मुद्दों को प्रमुखता देकर डीएमके को घेरना चाहती है।

केंद्र बनाम राज्य राजनीति

डीएमके का दावा है कि केंद्र सरकार दक्षिणी राज्यों के हितों की अनदेखी करती है। वहीं भाजपा का कहना है कि डीएमके जानबूझकर “उत्तर बनाम दक्षिण” का भाव पैदा कर रही है ताकि जनता का ध्यान अपने भ्रष्टाचार और शासन की विफलताओं से हटाया जा सके।
सीतारमण ने यह भी कहा कि कर वितरण के मुद्दे पर डीएमके का रवैया संघीय एकता के लिए खतरनाक है।

क्या असर होगा इस बयान का

तमिलनाडु में भाजपा अभी अपेक्षाकृत कमजोर है लेकिन लगातार अपने आधार को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। निर्मला सीतारमण जैसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री द्वारा डीएमके पर तीखा हमला करना भाजपा की रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाता है। यह बयान राज्य की राजनीति में नए विमर्श को जन्म दे सकता है।
राज्य की जनता के बीच यह सवाल अब उठ सकता है कि क्या डीएमके केवल पहचान आधारित राजनीति तक सीमित है या वह शासन और विकास के मुद्दों पर भी उतनी ही गंभीर है।

विकास बनाम पहचान की राजनीति

निर्मला सीतारमण का बयान तमिलनाडु की राजनीति के एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करता है — पहचान आधारित राजनीति बनाम विकास आधारित राजनीति। डीएमके यदि केवल द्रविड़ अस्मिता और भाषा के मुद्दों तक सीमित रहती है तो भाजपा और अन्य दल इसे शासन की विफलताओं के तौर पर पेश करेंगे।
भविष्य में तमिलनाडु की राजनीति इस पर निर्भर करेगी कि जनता किस मुद्दे को प्राथमिकता देती है — विकास और सुशासन को या फिर क्षेत्रीय अस्मिता को।

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