“अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क पर मोदी सरकार का प्रहार”

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पूनम शर्मा

ऐतिहासिक ड्रग जब्ती में भारत की निर्णायक भूमिका

इंटरपोल ने हाल ही में दुनिया की सबसे बड़ी सिंथेटिक ड्रग कार्रवाई की घोषणा की। “ऑपरेशन लायनफिश-मायाग III” के तहत केवल दो सप्ताह (30 जून से 13 जुलाई) में 18 देशों ने संयुक्त रूप से 76 टन मादक पदार्थ जब्त किए, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत करीब 6.5 अरब डॉलर आँकी गई। इसमें 51 टन मेथमफेटामाइन (लगभग 297 मिलियन “याबा” गोलियां) के साथ फेंटानिल, हेरोइन, कोकीन और रासायनिक प्रीकर्सर शामिल थे।
इस कार्रवाई में भारत को वह देश बताया गया जहाँ फेंटानिल की सबसे बड़ी खेप पकड़ी गई। फेंटानिल एक सिंथेटिक ओपिओइड है जो मॉर्फिन और हेरोइन से कहीं अधिक ताक़तवर है। कानूनी रूप से यह दर्द निवारक के रूप में इस्तेमाल होता है, लेकिन अवैध रूप से इसका निर्माण वैश्विक नशाखोरी संकट की जड़ बन चुका है।

सीमा राज्यों में सक्रिय ड्रग नेटवर्क पर शिकंजा

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर-पूर्व और तटीय इलाक़ों में विदेशी ड्रग्स की तस्करी एक बड़ा सिरदर्द बन रही थी। म्यांमार, लाओस और अन्य ‘गोल्डन ट्राएंगल’ क्षेत्र से आने वाली मेथमफेटामाइन और फेंटानिल जैसी दवाएँ सीमावर्ती राज्यों को निशाना बनाती हैं। इस बार म्यांमार में भी दो संदिग्ध वाहनों से 22 किलो हेरोइन और 5.25 मिलियन याबा गोलियां पकड़ी गईं।
इंटरपोल के अनुसार भारत में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने डार्कनेट पर चल रहे एक शीर्ष ड्रग सिंडिकेट “केटामेलन” का भंडाफोड़ किया। इस ऑपरेशन में LSD ब्लॉट्स, केटामाइन और 87,000 डॉलर मूल्य की डिजिटल संपत्तियाँ जब्त की गईं। जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क 14 महीनों में 600 से अधिक डिलीवरी कर चुका था।

तस्करों के बदलते हथकंडे

नशीले पदार्थों को पकड़ से बचाने के लिए तस्कर उन्हें सर्फ़बोर्ड, चाय के डिब्बों, कैट फूड पैकेट और एस्प्रेसो मशीनों में छुपा रहे थे। इतनी परिष्कृत तस्करी दर्शाती है कि भारत और पड़ोसी देशों को और अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है।

मोदी सरकार की ज़ीरो-टॉलरेंस नीति

पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने सीमा राज्यों और समुद्री तटों पर नारकोटिक्स नियंत्रण को मज़बूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। “नशा मुक्त भारत अभियान” से लेकर NCB की तकनीकी और मानव संसाधन क्षमता बढ़ाना, इंटरपोल व अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग—ये सब मोदी सरकार की सख़्त नीति को दर्शाते हैं।
इस अभियान से यह संदेश गया कि भारत केवल अपने भीतर ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार है।

सीमा राज्यों को मज़बूत करना, ताकि बाहरी ख़तरों पर लगाम लगे

ड्रग तस्करी केवल स्वास्थ्य या अपराध का मामला नहीं है; यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दोनों से जुड़ा है। मादक पदार्थों से आतंकवाद और संगठित अपराध को फंडिंग मिलती है। मोदी सरकार ने सीमा राज्यों—विशेषकर उत्तर-पूर्व, जम्मू-कश्मीर और तटीय इलाक़ों—में सुरक्षा बलों की तैनाती, आधुनिक स्कैनर, ड्रोन निगरानी और इंटेलिजेंस नेटवर्क मज़बूत किए हैं।
इससे न केवल युवाओं को नशे के जाल से बचाया जा रहा है बल्कि बाहरी दुश्मनों की फंडिंग और लॉजिस्टिक चैनल भी ध्वस्त किए जा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग: भारत का उभरता नेतृत्व

“ऑपरेशन लायनफिश-मायाग III” यह दर्शाता है कि भारत अब महज़ सहभागी नहीं बल्कि निर्णायक साझेदार है। लाओस, म्यांमार और अन्य देशों में भारी मात्रा में ड्रग्स जब्ती और मशीनरी सीज़ करना इस बात का संकेत है कि साझा खुफिया सूचनाओं और समन्वित कार्रवाई का कितना प्रभावी परिणाम मिल सकता है।

युवाओं के स्वास्थ्य और समाज की सुरक्षा

फेंटानिल और निटाज़ीन जैसे नए सिंथेटिक ड्रग्स मॉर्फिन से 200 गुना ताक़तवर हैं और बेहद कम मात्रा में घातक असर डाल सकते हैं। इनकी तस्करी रोकना केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक-नैतिक दायित्व भी है। मोदी सरकार ने नशा मुक्त भारत अभियान के तहत स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए, पुनर्वास केंद्रों को मज़बूत किया और राज्यों को धन आवंटित किया।

निष्कर्ष: “नशा मुक्त सीमाएं, सुरक्षित भारत”

इंटरपोल का यह ऐतिहासिक ऑपरेशन साबित करता है कि ड्रग माफिया चाहे कितना भी संगठित क्यों न हो, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और राजनीतिक इच्छाशक्ति से उसे तोड़ा जा सकता है। मोदी सरकार की सख़्त नीति, सीमा राज्यों में सतर्कता और युवाओं के लिए जागरूकता अभियान एक साथ मिलकर भारत को “नशा मुक्त” बनाने की दिशा में बढ़ा रहे हैं।
यह केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का हिस्सा है। बाहरी खतरों को रोकने के लिए ज़रूरी है कि भीतर से समाज मज़बूत, स्वच्छ और स्वस्थ रहे—और यही संदेश इस कार्रवाई ने पूरी दुनिया को दिया।

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