राकेश शर्मा
राहुल गांधी एक बार फिर विदेश यात्रा पर निकल पड़े हैं। गनीमत है कि इस बार कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता जयराम रमेश ने औपचारिक रूप से बताया कि राहुल गांधी दक्षिण अमेरिका के चार देशों के दौरे पर हैं। शायद मलेशिया यात्रा के दौरान हुई फजीहत से बचने के लिए कांग्रेस ने यह औपचारिकता निभाई हो।
यह ध्यान देने योग्य है कि मलेशिया की उनकी पिछली यात्रा बिहार में चुनावी धांधली के आरोप लगाने के तुरंत बाद हुई थी। उस यात्रा की जानकारी उनकी सुरक्षा में लगे अधिकारियों तक को नहीं दी गई थी। कथित तौर पर उस दौरान उनकी मुलाकात जॉर्ज सोरोस के बेटे, अमेरिकी अधिकारियों और जाकिर नाइक से हुई थी। स्वाभाविक है कि ऐसी मुलाकातों में किसी फिल्म या सामान्य विषय पर चर्चा नहीं हुई होगी।
आज जब देश में “आई लव मोहम्मद” जैसे नारे पर झूठा आंदोलन चलाया जा रहा है और लद्दाख में कांग्रेस से जुड़े तत्वों और सोनम वांगचुक की भूमिका से हिंसा भड़काई जा रही है, ऐसे समय राहुल गांधी का दक्षिण अमेरिका दौरा कई सवाल खड़े करता है। कहा जा रहा है कि वे वहां राजनीतिज्ञों, छात्रों और व्यापारियों से मुलाकात करेंगे तथा राजनीतिक एवं सामरिक विषयों पर चर्चा करेंगे।
यहाँ सवाल उठता है कि विपक्ष के नेता के रूप में उन्हें राजनीतिक विमर्श का अधिकार तो है, लेकिन सामरिक विषयों पर बातचीत का अधिकार केवल भारत सरकार और उसके प्रतिनिधियों को है।
दरअसल, राहुल गांधी का इतिहास रहा है कि वे विदेशी धरती पर बार-बार भारत को बदनाम करने वाले बयान देते हैं। कभी कहते हैं कि भारत का संविधान खतरे में है, कभी लोकतंत्र को असुरक्षित बताते हैं, तो कभी विदेशी ताकतों से “भारत का लोकतंत्र बचाने” की अपील करते हैं। यहाँ तक कि वे यह भी कह चुके हैं कि “भारत कोई राष्ट्र नहीं बल्कि राज्यों का समूह है”।
विदेशी पुरस्कार और भारत विरोधी एजेंडा
यह भी गौर करने योग्य है कि कई ऐसे लोग जिन्हें मैगसेसे अवार्ड से सम्मानित किया गया है, भारत के खिलाफ एजेंडा चलाने में सक्रिय रहते हैं।
- अरविंद केजरीवाल खुले तौर पर लद्दाख जैसे आंदोलनों के देशभर में फैलने की बात करते हैं।
- रवीश कुमार को देश में कभी कुछ सकारात्मक नजर नहीं आता, उनका पूरा फोकस केवल सरकार विरोधी नैरेटिव बनाने पर रहता है।
- सोनम वांगचुक पर आरोप है कि उन्होंने विदेशी फंडिंग के सहारे लद्दाख में विकास कार्यों को रोकने और हिंसा भड़काने का काम किया है। इसी कारण हाल ही में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के अंतर्गत कार्रवाई की गई है।
उधर “आई लव मोहम्मद” आंदोलन के नाम पर देशभर में फैलाई गई अराजकता को भी जनता ने देखा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे सख्ती से नियंत्रित कर स्थिति को संभाला है।
निष्कर्ष और अपील
प्रश्न यह है कि ऐसे देशविरोधी तत्वों को आखिर कब तक ढील दी जाएगी? विपक्ष का नेता होने के नाते राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि विदेश में वे केवल कांग्रेस के नहीं, बल्कि भारत के प्रतिनिधि हैं। उनके किसी भी शब्द या कदम से भारत विरोधी ताकतों को बल नहीं मिलना चाहिए।
सरकार से अपेक्षा है कि जो तत्व देश की शांति और विकास में बाधक हैं, उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए ताकि भारत अपनी प्रगति की राह पर बिना किसी व्यवधान के आगे बढ़ सके।