बिहार विधानसभा चुनाव 2025: नीतीश बनाम तेजस्वी, 14 नवंबर को फैसला
बिहार चुनाव में चाचा-भतीजे की टक्कर, नतीजों पर सबकी नजर
- चालीस साल बाद दो चरणों में हो रहा बिहार विधानसभा चुनाव, वोटों की गिनती 14 नवंबर को।
- नीतीश कुमार को रिकॉर्ड 10वीं बार सीएम बनने का मौका, तेजस्वी यादव पहली बार शीर्ष सत्ता के लिए मैदान में।
- नतीजा सिर्फ बिहार नहीं, राष्ट्रीय राजनीति के कई बड़े समीकरण करेगा तय।
समग्र समाचार सेवा
पटना, 7 अक्टूबर 2025 – चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। बिहार में चालीस साल बाद दो चरणों में मतदान होगा। 243 सीटों के लिए 6 और 11 नवंबर को वोटिंग की जाएगी, जबकि 14 नवंबर को मतों की गिनती होगी। इस बार कुल 90,712 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और हर बूथ पर 1200 से ज्यादा मतदाता नहीं होंगे। सभी बूथों पर 100% वेबकास्टिंग की जाएगी और मतदाता बूथ तक मोबाइल लेकर जा सकेंगे।
मुख्य चुनावी फैक्टर
- EVM पर प्रत्याशियों की रंगीन फोटो और बड़े अक्षरों में सीरियल नंबर रहेगा।
- VVPAT गिनती अनिवार्य होगी और हर दो घंटे में वोटर टर्नआउट रियल टाइम अपडेट होगा।
- नए नियमों के तहत पॉलिंग सेंटर के 100 मीटर के भीतर पोलिंग एजेंट बैठ सकेंगे।
किसका क्या है दांव पर?
इस चुनाव में नीतीश कुमार के पास 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड मौका है। नरेंद्र मोदी के पास पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनवाने की चुनौती है। तेजस्वी यादव के सामने 20 साल बाद सत्ता की सीढ़ी चढ़ने का मौका है। वहीं, अन्य नेता जैसे चिराग पासवान अपनी पार्टी की ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, तो प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव उनकी राजनीति की परीक्षा है।
प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों का असर
यह चुनाव केवल एक राज्य के लिए नहीं बल्कि जीएसटी रिफॉर्म, ऑपरेशन सिंदूर और वोट चोरी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर भी जनमत साबित होगा। विपक्ष के कैंपेन के बाद ये पहला बड़ा इलेक्शन है, जहां जनता की राय केन्द्र और राज्यों की राजनीति पर दूरगामी असर डालेगी।
महिला मतदाता और सामाजिक समीकरण
इस बार बिहार के चुनाव में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, एक करोड़ 21 लाख महिलाओं को नीतीश सरकार ने सीधे लाभ दिया है, वहीं विपक्ष की तरफ से महिलाओं को 2500 रुपए प्रतिमाह की पेशकश है। लालू परिवार के भीतर की कलह और ओवैसी समेत छोटे दलों का भी समीकरण पर असर पड़ सकता है।
सीटों के बंटवारे, अल्पसंख्यक वोट और अंतिम गिनती
परिसीमन, सीट बंटवारे और अल्पसंख्यक वोटर्स के खिंचाव ने मुकाबले को बहुत टेढ़ा बना दिया है। पहली बार, नामांकन की आखिरी तारीख से ग्यारह दिन पहले ही मतदान के विवरण और रणनीति पर सबकी नजर होगी।