बिहार महागठबंधन में टकराव: सीट बंटवारे पर आर-पार की जंग
राहुल-खरगे से बिना मिले लौटे तेजस्वी; RJD-कांग्रेस में छिड़ी शायरी की जंग
- तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे पर बात करने दिल्ली गए, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व (राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे) से मुलाकात नहीं हुई।
- कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मिले बिना ही तेजस्वी पटना लौट आए, जिससे महागठबंधन में मतभेद की अटकलें तेज हो गईं और कांग्रेस खेमे में नाराजगी देखने को मिली।
- सीट बंटवारे में गंभीर देरी के बीच, राजद और कांग्रेस के नेताओं के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर शायरी युद्ध शुरू हो गया, जिसने गठबंधन में तनाव को उजागर किया।
समग्र समाचार सेवा
पटना/नई दिल्ली, 14 अक्टूबर: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन की प्रक्रिया जल्द समाप्त होने वाली है, लेकिन महागठबंधन (MGB) में सीट बंटवारे का पेंच अभी तक फंसा हुआ है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव सोमवार को इस गतिरोध को तोड़ने के लिए पूरे दिन दिल्ली में डटे रहे, लेकिन उन्हें कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात का वक्त नहीं मिल पाया।
तेजस्वी यादव की केवल कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और बिहार कांग्रेस के नेताओं के साथ ही बैठक हो सकी। राहुल गांधी या पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मिले बिना ही तेजस्वी यादव रात में पटना लौट आए।
हालांकि, पटना पहुंचने पर उन्होंने मीडिया से बात करते हुए गठबंधन में सब कुछ ठीक होने का दावा किया। तेजस्वी ने कहा कि महागठबंधन एकजुट है और सीट बंटवारा ‘एक-दो दिन’ में घोषित हो जाएगा। इसी तरह की बात दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने भी कही। लेकिन, जिस तरह से तेजस्वी यादव को बिना शीर्ष नेतृत्व से मिले वापस लौटना पड़ा, उससे साफ है कि बात बन नहीं पाई है और कांग्रेस, खासकर बिहार कांग्रेस, में निराशा का माहौल है।
सीट बंटवारे की देरी और ‘शायरी युद्ध’ का आगाज
तेजस्वी यादव के दिल्ली से लौटते ही, राजद और कांग्रेस के नेताओं के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शायरी और दोहे के माध्यम से एक-दूसरे पर निशाना साधने का दौर शुरू हो गया। इस ‘शायरी युद्ध’ ने सार्वजनिक रूप से गठबंधन के आंतरिक मतभेदों को सामने ला दिया।
इसकी शुरुआत राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने की। उन्होंने रहीम के प्रसिद्ध दोहे का प्रयोग करते हुए ट्वीट किया:
“रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय; टूटे से फिर न मिले, मिले गांठ परिजाय।” उन्होंने ऊपर से यह भी लिख दिया कि यह दोहा ‘हर अवसर के लिए प्रासंगिक’ है।
मनोज झा के इस संकेतपूर्ण ट्वीट को कांग्रेस ने तत्काल गठबंधन टूटने की आशंका के तौर पर लिया। जवाब में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने अब्बास ताबिश का एक शेर पोस्ट किया, जिसका अर्थ था कि अभी भी हालात को सुधारा जा सकता है:
“पानी आंख में भर कर लाया जा सकता है, अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है।”
इसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक भी कूद पड़ीं और उन्होंने राजद पर तंज कसते हुए अमीर खुसरो का दोहा सुना दिया:
“खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी बा की धार; जो उतरो सो डूब गया, जो डूब गया सो पार। ‘ठगबंधन’ को हराने के लिए प्रासंगिक। जय हिन्द।”
रागिनी नायक के ‘ठगबंधन’ शब्द के इस्तेमाल से साफ़ ज़ाहिर है कि कांग्रेस के अंदरूनी खेमे में राजद को लेकर नाराज़गी गंभीर रूप ले चुकी है। इस लड़ाई में युवा कांग्रेस अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास और राजद प्रवक्ता जयंत जिज्ञासु भी शामिल हुए, जिन्होंने अपने-अपने पसंदीदा शेर और दोहे पोस्ट किए।
अटकलों का सैलाब और नामांकन की चुनौती
इस ‘शायरी युद्ध’ ने राजनीतिक अटकलों के सैलाब को तेज कर दिया है। भले ही दोनों पार्टियों के शीर्ष नेता किसी तरह की नकारात्मक बयानबाजी से बच रहे हैं, लेकिन जिस तरह से संगठन से जुड़े नेता सोशल मीडिया पर ‘प्रेम का दरिया’, ‘गाँठ’, और ‘जलते शहर’ जैसी बातें कर रहे हैं, उससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है।
स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने में केवल चार दिन बचे हैं। सीट बंटवारे पर अंतिम सहमति न बनने के कारण, कई सीटों पर उम्मीदवारों को सिंबल (पार्टी चिह्न) भी नहीं बांटा जा सका है। यह देरी न केवल उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार को प्रभावित कर रही है, बल्कि गठबंधन के एकजुटता के संदेश को भी कमजोर कर रही है, जिसका सीधा फायदा NDA को मिल सकता है।