कर्नाटक में RSS की गतिविधियों पर बैन की तैयारी, स्कूलों-कॉलेजों में नहीं लगेंगी शाखाएँ

कैबिनेट ने लिया बड़ा फैसला, मंत्री प्रियांक खरगे को धमकी देने वाला गिरफ्तार

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  • कर्नाटक कैबिनेट ने सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में RSS की बैठकों और अन्य गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए नियम लाने का फैसला किया है।
  • यह फैसला मंत्री प्रियांक खरगे के उस पत्र के बाद आया है, जिसमें उन्होंने RSS पर युवाओं का ब्रेनवॉश करने और संविधान के विरुद्ध काम करने का आरोप लगाया था।
  • प्रियांक खरगे को धमकी देने के आरोप में महाराष्ट्र के सोलापुर से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जिसने मंत्री को फोन पर अभद्र टिप्पणियां की थीं।

समग्र समाचार सेवा

बेंगलुरु, 16 अक्टूबर: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एक बड़ा और विवादास्पद फैसला लिया है। राज्य के मंत्री प्रियांक खरगे ने गुरुवार को जानकारी दी कि कर्नाटक मंत्रिमंडल ने सरकारी स्कूलों और कॉलेज परिसरों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों को रोकने के लिए नए नियम लाने का फैसला किया है। यह कदम राज्य की राजनीति में एक बड़ी हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि RSS को सत्ताधारी पार्टी बीजेपी की मातृ संस्था माना जाता है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

कर्नाटक में सत्ता में आने के बाद से ही कांग्रेस सरकार बीजेपी शासनकाल के कुछ फैसलों को पलटने और वैचारिक मोर्चे पर बीजेपी को चुनौती देने का प्रयास कर रही है।

प्रियांक खरगे की मांग

इस पूरे फैसले की शुरुआत राज्य के मंत्री प्रियांक खरगे द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को लिखे गए एक पत्र से हुई थी। खरगे ने अपने पत्र में सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी मंदिरों में RSS की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि RSS परिसरों में युवाओं का ब्रेनवॉश कर रही है और संविधान के सिद्धांतों के विरुद्ध काम कर रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी एक दिन पहले ही इस बात पर विचार करने की बात कही थी कि “कैसे सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी संगठन लोगों को परेशान न करे।”

वैचारिक लड़ाई

यह फैसला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहन वैचारिक लड़ाई का हिस्सा है। कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षण संस्थानों में RSS की शाखाएं लगाने से शैक्षणिक माहौल प्रदूषित होता है और छात्र एक विशेष राजनीतिक विचारधारा की ओर झुकाव रखने लगते हैं। सरकार का मानना है कि सरकारी परिसर सभी नागरिकों के लिए समान रूप से उपलब्ध होने चाहिए और किसी एक संगठन को विशेष अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

बीजेपी ने दी चुनौती, धमकी देने वाला गिरफ्तार

इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ी आलोचना की है।

बीजेपी का पलटवार

बीजेपी नेताओं ने खरगे के रुख की निंदा की और उन्हें राज्य में RSS पर प्रतिबंध लगाने की सीधी चुनौती दी है। बीजेपी का कहना है कि RSS एक राष्ट्रवादी और सांस्कृतिक संगठन है, जो देश के निर्माण में योगदान दे रहा है। बीजेपी इसे कांग्रेस द्वारा अपने तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने और विपक्ष के कार्यकर्ताओं को परेशान करने का कदम बता रही है।

खरगे को धमकी और गिरफ्तारी

इस बीच, प्रियांक खरगे को धमकी भरे फोन कॉल आने का मामला भी सामने आया। बेंगलुरु पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए, महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले धनेश नरोने नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कथित तौर पर खरगे को फोन कर उनके पत्र के लिए अभद्र टिप्पणियां की थीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने एक सर्च इंजन की मदद से मंत्री का फ़ोन नंबर हासिल किया था। बेंगलुरु और कलबुर्गी पुलिस की संयुक्त टीम ने लातूर में छिपे आरोपी को गिरफ्तार कर बेंगलुरु ले आई है और आगे की पूछताछ जारी है। मंत्री खरगे ने खुद इस बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मएक्स‘ पर साझा किया था।

आगे क्या?

कर्नाटक कैबिनेट के इस फैसले के बाद, अब राज्य सरकार जल्द ही नियमों का मसौदा तैयार करेगी और इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। हालांकि, बीजेपी इस फैसले को लेकर अदालत का रुख भी कर सकती है, जिससे यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर एक लंबी लड़ाई का कारण बन सकता है। यह कदम कांग्रेस के धर्मनिरपेक्ष एजेंडे को मजबूती देता है, वहीं बीजेपी को चुनावी मैदान में ध्रुवीकरण का एक नया मुद्दा प्रदान करता है।

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