बिहार का ‘सिग्मा गैंग’ खत्म: रोहिणी एनकाउंटर में 4 गैंगस्टर ढेर

दिल्ली में मारा गया कुख्यात अपराधी रंजन पाठक, बिहार चुनाव से पहले हिंसा की साजिश नाकाम

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  • दिल्ली पुलिस और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बुधवार देर रात दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक बड़ी मुठभेड़ हुई।
  • इस एनकाउंटर में बिहार के सबसे वांछित अपराधी रंजन पाठक समेत चार गैंगस्टर मारे गए हैं। यह गैंग बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में हिंसा और बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश रच रहा था।
  • मारा गया गैंगस्टर रंजन पाठक कुख्यात ‘सिग्मा एंड कंपनी’ सिंडिकेट का मास्टरमाइंड था, जिसका आपराधिक नेटवर्क बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और भारत-नेपाल सीमा तक फैला हुआ था।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर: बुधवार देर रात रोहिणी क्षेत्र में दिल्ली पुलिस और बिहार पुलिस की साझा टीम ने एक गुपचुप ऑपरेशन को अंजाम दिया। खुफिया जानकारी मिली थी कि रंजन पाठक अपने गिरोह के तीन अन्य सदस्यों के साथ दिल्ली में छिपा हुआ है और आगामी बिहार चुनावों से पहले राज्य में बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की फिराक में है।

कई हफ्तों की निगरानी के बाद, पुलिस टीम ने रोहिणी में गैंग को घेर लिया। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने के बजाय बदमाशों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की। इस भीषण मुठभेड़ में चारों गैंगस्टर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मारे गए गैंगस्टरों की पहचान रंजन पाठक, अमन ठाकुर, बिमलेश महतो और मनीष पाठक के रूप में हुई है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से तीन अपराधी बिहार के सीतामढ़ी जिले के थे, जबकि एक (अमन ठाकुर) दिल्ली के करावल नगर का निवासी था। इस संयुक्त कार्रवाई को संगठित अपराध और चुनाव सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

‘सिग्मा एंड कंपनी’ का खौफ और नेपाल कनेक्शन

एनकाउंटर में मारा गया सरगना रंजन पाठक बिहार के अपराध जगत में एक खतरनाक नाम था। वह ‘सिग्मा एंड कंपनी’ नामक आपराधिक गिरोह का संचालन करता था, जो रंगदारी, सुपारी किलिंग और हथियार तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल था। पुलिस सूत्रों ने खुलासा किया है कि इस गिरोह के फंडिंग चैनल कथित तौर पर नेपाल से जुड़े हुए थे, जिससे ये अपराधी वारदात को अंजाम देने के बाद आसानी से सीमा पार भाग जाते थे।

रंजन पाठक कई हाई-प्रोफाइल हत्याओं के लिए वांछित था, जिनमें सीतामढ़ी में आदित्य सिंह और स्थानीय पंचायत प्रमुख रानी देवी के बहनोई मदन कुशवाहा की हत्याएं शामिल थीं। इसके अलावा, उसने ब्रह्मर्षि सेना के जिला अध्यक्ष राम मनोहर शर्मा की हत्या की जिम्मेदारी भी ली थी।

रंजन पाठक का ‘क्रिमिनल बायो-डेटा’ और पुलिस को चुनौती

रंजन पाठक केवल एक अपराधी नहीं था, बल्कि उसने अपनी गतिविधियों के माध्यम से अपराध को ब्रांड बनाने की कोशिश की। सीतामढ़ी में एक सनसनीखेज हत्या के बाद, उसने कथित तौर पर मीडिया आउटलेट्स को एक पत्र भेजा था, जिसमें उसने न केवल अपने अपराधों को कबूल किया, बल्कि पुलिस पर भ्रष्टाचार और जातिगत दबाव में उसे झूठे मामलों में फंसाने का आरोप भी लगाया था।

अपने कुख्यात पत्र में, उसने पत्रकारों को अपना “आपराधिक बायो-डेटा” भी सर्कुलेट किया था। यह हरकत अपराधियों के बीच खौफ फैलाने और पुलिस को खुली चुनौती देने का उसका तरीका था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पाठक और उसके साथियों की गतिविधियों पर पिछले कई महीनों से कड़ी निगरानी रखी जा रही थी, ताकि चुनाव पूर्व हिंसा की किसी भी योजना को विफल किया जा सके।

संगठित अपराध पर निर्णायक वार

पुलिस अधिकारियों ने दिल्ली-बिहार पुलिस के इस संयुक्त ऑपरेशन को संगठित अपराध नेटवर्क पर एक निर्णायक वार करार दिया है, जो राज्य की सीमाओं के पार सक्रिय था। उनका मानना है कि इस एनकाउंटर ने न केवल एक बड़े आपराधिक सिंडिकेट का सफाया किया है, बल्कि बिहार में आगामी चुनावों के दौरान संभावित हिंसा की बड़ी साजिश को भी नाकाम कर दिया है। यह कार्रवाई अंतरराज्यीय समन्वय और त्वरित खुफिया कार्रवाई की सफलता को दर्शाती है, जो आने वाले समय में अपराध नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगी।

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