भाजपा सांसद बृजलाल का दावा: लखनऊ में कई बांग्लादेशी अवैध रूप से रहते हैं — सीएम से डिपोर्ट की मांग

पूर्व डीजीपी और राज्यसभा सांसद बृजलाल ने मॉर्निंग वॉक के दौरान बनाए वीडियो में कहा कि नगर निगम और कुछ अफसरों ने इन्हें स्थानीय पहचान-पत्र दे दिए; सुरक्षा जांच की आवश्यकता बताई।

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  • बृजलाल ने कहा कि गोमतीनगर विस्तार और नदी किनारे बांग्लादेशियों की झोपड़ियाँ दिखीं।
  • उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सफाईकर्मियों को नगर निगम ने ID दे कर लखनऊ का निवासी बनाया।
  • सांसद ने इन लोगों को देश की सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक बताते हुए CM से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
  • बृजलाल ने 2007 के अदालत-बम ब्लास्ट व कुछ आतंकी संगठनों का हवाला देते हुए जांच तेज करने की बात कही; नगर निगम और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी नहीं मिली।

समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, 23 अक्टूबर: राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने लखनऊ में कथित बांग्लादेशी आव्रजन से जुड़ा एक मामला उठाया है। गुरुवार सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान उन्होंने कुछ सफाईकर्मियों का वीडियो बनाया और दावा किया कि वे बांग्लादेशी मूल के हैं। बृजलाल ने कहा कि वे लोग दिनभर सड़कों पर बैठे रहते हैं और कुछ बच्चे चौराहों पर गुब्बारे, पेन बेचते या भीख मांगते नजर आते हैं।

 

सांसद ने आरोप लगाया कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों ने इन लोगों को पहचान-पत्र (ID) दे कर लखनऊ का निवासी दिखा दिया है, जिसके कारण उनकी संख्या और स्थानीय उपस्थिति सामान्य नजर आ रही है। बृजलाल ने गोमतीनगर विस्तार के खाली मैदान, नदी-तलहटी और नालों के किनारे इन लोगों की झोपड़ियाँ होने का उल्लेख किया और कहा कि वे खुद को असम के कुछ जिलों का बताने के बावजूद उनकी भाषा असमी न लगने के कारण बांग्लादेशी प्रतीत होते हैं।

 

सांसद ने राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में भी चिंता जताई और कुछ बांग्लादेशी आतंकी संगठनों के भारत में सक्रिय होने के पुराने दावों का हवाला दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ऐसे लोगों की पहचान कराकर वापस भेजने (डिपोर्ट) की सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि पुलिस के पास फिलहाल पर्याप्त जानकारी नहीं है, इसलिए टीम बनाकर विस्तृत जांच की जरूरत है।

 

यह भी बताया गया कि बृजलाल ने अपने अनुभव और असम के कुछ स्थानों में तैनाती का जिक्र करते हुए स्थानीय स्थिति के बारे में अपनी राय रखी। फिलहाल नगर निगम और लखनऊ पुलिस की तरफ से इस मामले पर आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं हुआ है।

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