शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 700 अंक गिरा, जानें 3 मुख्य कारण

दिन के ऊपरी स्तरों से बाजार में तेज मुनाफावसूली, रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बिगाड़ा बाजार का मूड।

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  • सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 700 अंकों से अधिक फिसल गया, जबकि निफ्टी 25,900 के नीचे बंद हुआ।
  • गिरावट के प्रमुख कारणों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध और ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली शामिल रही।
  • बाजार में आईटी स्टॉक को छोड़कर लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी।

समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 24 अक्टूबर: गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने एक मजबूत शुरुआत के बाद अपनी शुरुआती बढ़त लगभग पूरी तरह गंवा दी। सेंसेक्स जो एक समय 85,290 के उच्चतम स्तर पर कारोबार कर रहा था, वह अंतिम घंटों में लगभग 734 अंक गिरकर 84,556.40 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 भी 26,099 के इंट्राडे हाई से 200 अंक से अधिक गिरकर 25,891.40 के स्तर पर मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। इस तेज गिरावट ने निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर दी है।

गिरावट के 3 प्रमुख कारण

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, दिन के अंत में हुई इस चौतरफा बिकवाली के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण रहे, जिन्होंने बाजार के सेंटिमेंट (निवेशकों के रुझान) को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया:

1. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतों में 5% से अधिक की भारी तेजी दर्ज की गई, जिससे इसकी कीमत $65.97 प्रति बैरल तक पहुँच गई।

कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए आयात बिल (Import Bill) बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे देश में महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है।

महंगाई की चिंता ने निवेशकों के उत्साह को ठंडा कर दिया और उन्होंने मुनाफावसूली शुरू कर दी।

2. रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध

अमेरिका द्वारा प्रमुख रूसी तेल आपूर्तिकर्ता कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा ने बाजार की चिंताएं बढ़ा दीं।

इन प्रतिबंधों से यह आशंका बढ़ गई है कि भारत को रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करनी पड़ सकती है और महंगे विकल्पों की ओर रुख करना पड़ सकता है।

इससे भी देश के आयात बिल और मुद्रास्फीति पर दबाव पड़ने की संभावना है, जिसका सीधा असर बाजार के प्रदर्शन पर देखने को मिला।

3. ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली और वैश्विक दबाव

भारतीय बाजार लगातार छह सत्रों से तेजी दर्ज कर रहा था, जिससे सूचकांक रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुँच गए थे।

ऐसे में, निवेशक ऊपरी स्तरों पर अपने मुनाफे को सुरक्षित (Profit Booking) करने के लिए बिकवाली करते हैं। साप्ताहिक F&O एक्सपायरी (Weekly Expiry) के कारण भी कारोबार के आखिरी घंटों में मुनाफावसूली तेज हो गई।

इसके अलावा, एशियाई और अमेरिकी बाजारों में कमजोरी के रुझान ने भी घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

आईटी स्टॉक्स में दिखी मजबूती

जहां बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल था, वहीं आईटी सेक्टर के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। इंफोसिस, एचसीएल टेक और टीसीएस जैसे प्रमुख आईटी शेयरों में अच्छी बढ़त रही। जानकारों का कहना है कि अमेरिका की तरफ से H1B वीजा को लेकर नरम रुख अपनाए जाने के संकेतों ने आईटी स्टॉक्स के सेंटीमेंट को मजबूत किया, जिसने बाजार को पूरी तरह से गिरने से कुछ हद तक बचाया।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक कारकों के चलते अस्थिरता (Volatility) बनी रह सकती है, लेकिन घरेलू मांग में सुधार और एफ़आईआई (FIIs) की संभावित वापसी से भारतीय बाजार में आगे मजबूती की उम्मीद है।

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