चुनाव आयोग ने AI और डिजिटल रूप से संशोधित सामग्री पर लगाई सख्त शर्तें, बिहार चुनाव की तैयारियाँ तेज़

EC ने राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को निर्देश दिया – चुनाव प्रचार में कृत्रिम या डिजिटल रूप से संशोधित सामग्री का जिम्मेदार उपयोग करें; हर मतदान केंद्र पर न्यूनतम सुविधाएँ सुनिश्चित होंगी

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  • आयोग ने कहा कि किसी भी कृत्रिम रूप से निर्मित या डिजिटल रूप से परिवर्तित छवि, ऑडियो या वीडियो पर “कृत्रिम रूप से निर्मित”, “डिजिटल रूप से परिवर्तित” या “संशोधित सामग्री” का लेबल देना अनिवार्य है।
  • यह लेबल संबंधित सामग्री के कम से कम 10 प्रतिशत दृश्य भाग में स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
  • सामग्री के साथ निर्माण के लिए उत्तरदायी संस्था या व्यक्ति का नाम कैप्शन या मेटाडेटा में देना अनिवार्य है।
  • किसी व्यक्ति की पहचान, स्वर या रूप-रंग को बिना अनुमति बदले, मतदाताओं को भ्रमित करने वाले कंटेंट का निर्माण और प्रचार कानूनन अपराध है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर:चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों और उनके प्रचार प्रतिनिधियों को चुनाव प्रचार के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल रूप से संशोधित सामग्री का जिम्मेदारी से उपयोग करने की एडवाइजरी जारी की है।

आयोग ने कहा है कि यदि कोई छवि, ऑडियो या वीडियो कृत्रिम रूप से तैयार या परिवर्तित किया गया है, तो उसे साफ और स्पष्ट लेबल के साथ प्रस्तुत करना होगा। लेबल कम से कम 10 प्रतिशत दृश्य भाग में दिखना चाहिए।

साथ ही, ऐसी सामग्री में निर्माण के लिए उत्तरदायी संस्था या व्यक्ति का नाम भी कैप्शन या मेटाडेटा में देना जरूरी है। आयोग ने चेताया है कि किसी व्यक्ति की पहचान, स्वर या रूप-रंग में बदलाव कर मतदाताओं को भ्रमित करने का प्रयास कानूनन दंडनीय होगा।

इसके अलावा, आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया है कि हर मतदान केंद्र पर आवश्यक न्यूनतम सुविधाएँ (Assured Minimum Facilities) उपलब्ध कराई जाएं। इन सुविधाओं में पीने का पानी, प्रतीक्षालय, शौचालय, पर्याप्त प्रकाश, दिव्यांग मतदाताओं के लिए रैंप, मानक मतदान कक्ष और उचित संकेत-पट्ट शामिल हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। पहला चरण 6 नवम्बर को और दूसरा चरण 11 नवम्बर को होगा। पहले चरण में 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा।

राजनीतिक दलों के शीर्ष प्रचारक लगातार रैलियाँ कर रहे हैं। प्रचार में मुख्य मुद्दों के रूप में विकास, कानून-व्यवस्था, बेरोज़गारी, पलायन और शिक्षा प्रमुख रूप से उठाए जा रहे हैं।

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