भारतीय सेना की ‘न्यू नॉर्मल’ रणनीति: रात का अभ्यास
संयुक्त राष्ट्र के आर्टिकल 51 से जुड़ा है यह कदम, आतंकवाद को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा
- भारतीय सेना ने आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए ‘न्यू नॉर्मल’ नामक नई रणनीति अपनाई है।
- इस रणनीति के तहत, किसी भी आतंकी गतिविधि को “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा।
- सेना अब अपनी 70% ट्रेनिंग रात में और केवल 30% ट्रेनिंग दिन के समय कर रही है, जो तैयारी में एक बड़ा बदलाव है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 01 नवंबर: भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया और सुरक्षा रणनीति को एक अभूतपूर्व नया आयाम दिया है। भारतीय सेना अब ‘न्यू नॉर्मल’ (New Normal) के दिशानिर्देशों का पालन कर रही है। यह वह राजनीतिक दिशा-निर्देश है जिसके तहत देश के भीतर होने वाली किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधि को मात्र कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि सीधे-सीधे युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। यह फैसला देश की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरे में डालने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता को दर्शाता है। यह नई रणनीति भारत को वैश्विक मंच पर आत्मरक्षा के अधिकार का मजबूती से उपयोग करने का अवसर प्रदान करती है।
युद्ध की तैयारी: 70% ट्रेनिंग रात में
इस ‘न्यू नॉर्मल’ रणनीति को ज़मीन पर उतारने के लिए भारतीय सेना ने अपनी प्रशिक्षण प्रणाली में एक बड़ा और संरचनात्मक बदलाव किया है। दक्षिण-पश्चिम आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सेना अब युद्ध की तैयारियों के लिए 70 प्रतिशत प्रशिक्षण रात के वक्त कर रही है, जबकि दिन के समय केवल 30 प्रतिशत प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
रात के समय सैन्य अभ्यास पर इस बड़े जोर का मुख्य कारण यह है कि आधुनिक युद्ध में और विशेष रूप से आतंकवादी तत्वों के खिलाफ ऑपरेशन में, रात का अंधेरा अक्सर हमलावर को छिपने और फायदा उठाने का अवसर देता है। रात के ऑपरेशनों में महारत हासिल करके, सेना अपनी मारक क्षमता और प्रतिक्रिया गति को उस समय भी बनाए रख सकती है जब दुश्मन सबसे अधिक सक्रिय होता है। इसके लिए नई तकनीक और क्षमताओं को भी जोड़ा जा रहा है, ताकि भारतीय सैनिक रात के अंधेरे में भी दिन की तरह ही सटीकता और प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़ा ‘आत्मरक्षा’ का अधिकार
इस ‘न्यू नॉर्मल’ रणनीति का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर से सीधा जुड़ाव है। इस दिशा-निर्देश का पालन करके, भारत को संयुक्त राष्ट्र संघ चार्टर के आर्टिकल 51 के उपयोग का हक मिल जाता है। आर्टिकल 51 सदस्य देशों को आत्मरक्षा (Inherent Right of Self-Defence) का जन्मजात अधिकार देता है, यदि उन पर सशस्त्र हमला होता है।
चूँकि भारत अब किसी भी आतंकी हरकत को “सशस्त्र हमले/युद्ध की कार्रवाई” मानेगा, इसलिए वह आर्टिकल 51 का हवाला देकर अपनी सीमाओं से परे भी बड़ी आसानी से आतंकवादी ठिकानों को कुचलने में सक्षम हो जाएगा। यह आतंकवाद के प्रायोजक देशों को एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब किसी भी कीमत पर आतंकी हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेगा और उन्हें कुचलने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानूनी ढाँचे का उपयोग करने को पूरी तरह तैयार है। सेना के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह नई तकनीक, रणनीति और कानूनी ढांचे का एक एकीकृत मेल है, जिसका एकमात्र उद्देश्य देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।