मोकामा हत्याकांड से गरमाया बिहार चुनाव, अनंत सिंह पर FIR

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समग्र समाचार सेवा
पटना/मोकामा, 01 नवंबर: बिहार विधानसभा चुनाव के बीच मोकामा में हुई दुलारचंद यादव हत्याकांड ने राज्य की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है। जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के बाद मोकामा विधानसभा सीट से जदयू के प्रत्याशी और बाहुबली नेता अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस घटना ने एक बार फिर बिहार की चुनावी राजनीति में बाहुबल और अपराध के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है, जिसपर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।

🔫 चुनावी हिंसा: दुलारचंद हत्याकांड की पूरी कहानी

हत्याकांड: मोकामा के टाल इलाके में जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे 70 वर्षीय दुलारचंद यादव की गोली मारकर और फिर वाहन से कुचलकर निर्मम हत्या कर दी गई।

FIR और आरोप: दुलारचंद के पोते के बयान पर जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह, उनके दो भतीजे रणवीर और कर्मवीर सहित कुल पांच लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। परिजनों का आरोप है कि गोली अनंत सिंह के समर्थकों ने चलाई और फिर गाड़ी चढ़ाई गई।

जदयू प्रत्याशी का पलटवार: अनंत सिंह ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है और इसे अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और राजद प्रत्याशी वीणा देवी के पति सूरजभान सिंह की साजिश करार दिया है। अनंत सिंह के समर्थक ने भी जन सुराज प्रत्याशी और उनके समर्थकों पर हमला करने का एक अलग मामला दर्ज कराया है।

🗣️ जंगलराज बनाम गुंडाराज: सियासी घमासान

मोकामा की चुनावी हिंसा ने महागठबंधन और एनडीए के बीच ‘जंगलराज’ और ‘गुंडाराज’ की बहस को तेज कर दिया है।

तेजस्वी यादव ने घेरा

महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने इस हत्याकांड को ‘सत्ता के संरक्षण में हुई हत्या’ करार दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर बिहार में फिर से ‘महाजंगलराज’ लौटने का गंभीर आरोप लगाया। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद लोग खुलेआम बंदूक और गोली लेकर कैसे घूम रहे हैं, जो सीधे तौर पर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।

अनंत सिंह पर प्रशांत किशोर का निशाना

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मोकामा हत्याकांड को लेकर प्रशासन पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है और यह घटना कानून व्यवस्था की विफलता है। प्रशांत किशोर ने बिहार की जनता से ऐसे उम्मीदवार चुनने की अपील की जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो, और कहा कि जन सुराज ने यह विकल्प दिया है।

अपराध के मुद्दे पर बैकफुट पर NDA

इस घटना ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अपराध-मुक्त राजनीति की छवि को बड़ा झटका दिया है। जदयू प्रत्याशी पर ही हत्या का आरोप लगने से विपक्षी दलों को बाहुबलियों को टिकट देने के मामले पर सरकार को घेरने का मौका मिल गया है। मोकामा की यह घटना दिखाती है कि बिहार के कुछ हिस्सों में चुनावी लड़ाई आज भी जाति और बाहुबल के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ ‘छोटे सरकार’ कहे जाने वाले अनंत सिंह की छवि एक बार फिर चर्चा में है।

मोकामा में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और पूरे टाल क्षेत्र को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है, क्योंकि इस हत्याकांड के बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है। पुलिस विभिन्न पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।

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