प्रियंका गांधी के बयान से मचा सियासी बवाल, बिहार में गरमाई सियासत

कटिहार की रैली में BJP पर हमला — ‘वोट के वक्त साड़ी देने वाला शराबी पति’; NDA बोली, महिलाओं का अपमान

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  • प्रियंका गांधी ने कटिहार की सभा में BJP की तुलना “शराबी पति” से की।
  • कहा, बीजेपी चुनाव से पहले पैसे देकर जनता को बहलाने की कोशिश करती है।
  • NDA ने इसे बिहार की महिलाओं का अपमान बताया, बोलीं, “शराबबंदी वाले राज्य का मज़ाक उड़ाया।”
  • कांग्रेस ने सफाई दी, बयान का मतलब महिलाओं को जागरूक करने से था।

समग्र समाचार सेवा
पटना, 9 नवंबर: बिहार चुनाव अभियान के बीच कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के एक बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी है।
कटिहार में आयोजित एक महिला जनसभा में प्रियंका ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा,

“सोचिए, अगर किसी सहेली का पति रोज पीटता हो और फिर चुनाव के समय उसके लिए साड़ी ले आए, तो आप क्या कहेंगी? यही न कि उसकी बातों में मत आना?

बीजेपी भी सालों तक जनता को परेशान करती है और चुनाव आते ही थोड़े पैसे और झूठे वादों से मनाने की कोशिश करती है।”

प्रियंका गांधी ने महिलाओं से कहा कि वे “समझदार हैं, लालच में न आएं, जो सही है उसी को वोट दें।”
उनका यह बयान जैसे ही मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, बिहार का सियासी तापमान बढ़ गया।

NDA का पलटवार:

प्रियंका के बयान पर BJP और JDU दोनों दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। BJP के प्रवक्ता संजय जायसवाल ने कहा,

> “प्रियंका गांधी बिहार की संस्कृति को नहीं समझतीं। यहां शराबबंदी लागू है, किसी पति का शराब पीकर घर आना संभव ही नहीं। उन्होंने बिहार की महिलाओं का अपमान किया है।”

जेडीयू की ओर से मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि,

> “यह बयान न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि बिहार की मेहनती महिलाओं का अपमान है, जो अब आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।”

NDA ने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि जब मुद्दे खत्म हो जाते हैं, तब कांग्रेस के नेता विवाद पैदा कर सुर्खियां बटोरने की कोशिश करते हैं।

कांग्रेस की सफाई:

विवाद बढ़ने पर कांग्रेस ने प्रियंका के बयान का बचाव किया।
कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा,

> “प्रियंका गांधी का आशय महिलाओं को जागरूक करने से था। उन्होंने किसी वर्ग या व्यक्ति की तुलना नहीं की, बल्कि राजनीतिक पाखंड पर कटाक्ष किया था।”

उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार वर्षों से “महिलाओं की सुरक्षा, बेरोज़गारी और महंगाई” के मुद्दों पर नाकाम रही है और अब “भावनाओं के सहारे वोट मांगने की कोशिश” कर रही है।

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