शादी का वादा और चार साल का रिश्ता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, यह रेप नहीं
महिला लेखपाल के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला — कहा, “लंबे समय तक चले सहमति वाले रिश्ते को बाद में रेप नहीं कहा जा सकता।”
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महिला लेखपाल ने सहकर्मी पर शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया था।
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दोनों चार साल तक रिलेशनशिप में रहे, शादी की बात पर बाद में विवाद हुआ।
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आरोपी ने जातिगत टिप्पणी के बाद शादी से इंकार किया, महिला ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, “आपसी सहमति से बने रिश्ते को रेप नहीं कहा जा सकता।”
समग्र समाचार सेवा
इलाहाबाद | 10 नवंबर: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी के वादे पर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में शादी से इंकार करने के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक आपसी सहमति से प्रेम संबंध रहे हैं और इस दौरान शारीरिक संबंध बने हैं, तो बाद में एक पक्ष द्वारा शादी से इनकार कर देने मात्र से इसे दुष्कर्म (रेप) नहीं माना जा सकता।
यह मामला महोबा जिले की एक महिला लेखपाल से जुड़ा है, जिसने 2019 में अपने सहकर्मी लेखपाल पर शादी के झांसे में रेप का आरोप लगाया था। शिकायत में महिला ने कहा कि आरोपी ने जन्मदिन की पार्टी के बहाने उसे घर बुलाया, नशीला पदार्थ दिया, दुष्कर्म किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। इसके बाद शादी का वादा कर चार साल तक शारीरिक संबंध बनाए रखे।
बाद में आरोपी ने जातिगत टिप्पणी करते हुए शादी से इंकार कर दिया। महिला ने पुलिस और निचली अदालत पर भी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। हालांकि, SC/ST विशेष न्यायालय, महोबा ने 17 अगस्त 2024 को मामला खारिज कर दिया था।
आरोपी की दलील:
आरोपी के वकील ने हाईकोर्ट में कहा कि दोनों लंबे समय से रिलेशनशिप में थे और शादी की बात चल रही थी। कुछ कारणों से शादी नहीं हो सकी। बाद में तहसील और विभागीय अधिकारियों के सामने दोनों ने सुलह भी कर ली थी। आरोप लगाया गया कि ₹2 लाख रुपये लौटाने को लेकर विवाद हुआ और उसी के बाद महिला ने दोबारा केस दर्ज कराया।
अदालत की टिप्पणी:
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने कहा कि “अगर दो वयस्क चार साल तक प्रेम संबंध में रहे और उनके रिश्ते की जानकारी सभी को थी, तो यह माना जाएगा कि यह संबंध आपसी सहमति से था।”
अदालत ने यह भी कहा कि केवल शादी से इनकार करना या सामाजिक कारणों से शादी न होना, दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता। यह मान लेना कठिन है कि यदि शादी का वादा न होता, तो महिला शारीरिक संबंध नहीं बनाती।
हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज करते हुए साफ किया कि यह “रेप का मामला नहीं, बल्कि प्रेम संबंध में असहमति का मामला” है।