संभल में 47 साल पुराने दंगे से जुड़ा कुआं फिर चर्चा में, खुदाई शुरू

पीड़ित परिवार की मांग पर प्रशासन ने 1978 दंगे से जुड़े कुएं की खुदाई शुरू कराई, सुरक्षा के सख्त इंतज़ाम

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  • 1978 के दंगे से जुड़े मामले में पीड़ित परिवार की मांग पर खुदाई
  • कपिल रस्तोगी ने दादा की हत्या और कुएं में शव फेंके जाने का आरोप लगाया
  • DM–SP के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट की निगरानी में शुरू हुई प्रक्रिया
  • पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग, पुलिस बल तैनात; कई चरणों में होगी जांच

समग्र समाचार सेवा
संभल, 26 नवंबर: उत्तर प्रदेश के संभल में 47 साल पुराने दंगे की कहानी एक बार फिर चर्चा में है। मुस्लिम बहुल इलाके के एक पुराने कुएं की खुदाई बुधवार से शुरू की गई है। यह कदम दंगा पीड़ित परिवार द्वारा वर्षों बाद उठाई गई मांग के बाद उठाया गया।

खुदाई का कार्य सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार की निगरानी में किया जा रहा है। पुलिस और नगरपालिका की टीम मौके पर मौजूद है। इलाके में बैरिकेडिंग कर सुरक्षा घेरा बनाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया दो दिन पहले DM और SP द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत शुरू की गई है।

स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, यह वही कुआं है जिसका संबंध 1978 के दंगे से जोड़ा जाता रहा है। चबूतरा टूटने के बाद कुआं दिखाई देने लगा, जिसके बाद पीड़ित परिवार की मांग तेज हुई थी।

दंगा पीड़ित परिवार के सदस्य कपिल रस्तोगी ने अपनी शिकायत में दावा किया कि 1978 में दंगे के दौरान उनके दादा की दुकान इसी कुएं के सामने थी। दंगाइयों ने उनकी दुकान पर हमला किया और धारदार हथियारों से उनकी हत्या कर दी। कपिल का आरोप है कि शव को तराजू से बांधकर इसी कुएं में फेंका गया था। बरामदगी के दौरान शव पर कई चाकुओं के निशान मिले थे।

कपिल रस्तोगी ने कुछ महीने पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद उस समय कोई FIR दर्ज नहीं हुई थी। हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा 1978 दंगे का जिक्र किए जाने के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन को दो मांगें भेजी थीं,

  • 1. कुएं की वैज्ञानिक तरीके से खुदाई, ताकि सच्चाई सामने आए।
  • 2. घटना स्थल वाले चौक का नाम उनके दादा के नाम पर रखा जाए।

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, खुदाई कई चरणों में होगी। पहले कुएं को पूरी तरह साफ किया जाएगा, फिर अंदर मौजूद सामग्री और संभावित सबूतों की जांच की जाएगी। अधिकारी लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं और इसे तथ्य-जांच प्रक्रिया बताया है।

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