नई एफ-आइ-आर से राहुल–सोनिया घिरे, शीतकालीन सत्र से ठीक पहले कांग्रेस की रणनीति बिगड़ी

नेशनल हेराल्ड से जुड़ी ताज़ा FIR ने SIR और मेगा रैली पर सरकार को घेरने की कांग्रेस की तैयारी को झटका दिया

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  • दिल्ली पुलिस की  ई-ओ-डब्ल्यू ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित 6 लोगों पर नई एफ-आइ-आर  दर्ज की
  • मामला ए-जे-एल के कथित गलत अधिग्रहण और 2,000 करोड़ की संपत्तियों से जुड़ा
  • एफ-आइ-आर ई-डी की  शिकायत के आधार पर, ‘यंग इंडियन’ कंपनी का रोल भी मुख्य
  • 16 दिसंबर को कोर्ट का फैसला,  शीतकालीन सत्र से पहले कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 30 नवंबर:  शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ठीक पहले कांग्रेस एक बड़े कानूनी विवाद में घिर गई है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और 6 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ एक नई FIR दर्ज की है। यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (ए-जे-एल)के कथित रूप से गलत अधिग्रहण और उससे जुड़ी करीब 2,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर नियंत्रण से संबंधित है।

FIR में आरोप है कि यह अधिग्रहण ‘यंग इंडियन’ नाम की कंपनी के माध्यम से किया गया, जिसमें गांधी परिवार की करीब 76% हिस्सेदारी है। यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दी गई उस शिकायत के बाद हुई, जिसमें एजेंसी ने 2008 से 2024 तक हुई अपनी जांच के निष्कर्ष साझा किए थे।

ED ने PMLA की धारा 66(2) के तहत यह अनुरोध किया था कि दूसरी एजेंसी इस अपराध पर FIR दर्ज करे, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग जांच आगे बढ़ सके। यह पूरा मामला मूल रूप से BJP के पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की 2014 की निजी शिकायत से शुरू हुआ था, जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी।

कांग्रेस ने इस FIR को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। पार्टी नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जब भी कांग्रेस सरकार को घेरने की तैयारी करती है, पुराने मामलों को फिर से सामने लाने की कोशिश की जाती है। शीतकालीन सत्र की शुरुआत और 14 दिसंबर की मेगा रैली से पहले आया यह कदम कांग्रेस की रणनीति में बाधा डाल सकता है।

इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण मोड़ 16 दिसंबर को आ सकता है, जब अदालत अपना फैसला सुनाएगी। यदि फैसला कांग्रेस नेतृत्व के प्रतिकूल आता है, तो पार्टी के लिए राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।

दूसरी ओर, यह भी सवाल खड़ा है कि क्या ‘इंडिया ब्लॉक’ इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ खड़ा होगा। DMK, TMC, RJD जैसे दल अपने-अपने राज्यों में चुनावी परिस्थितियों को देखते हुए सतर्क हैं और ऐसे मामलों में शामिल होने से पहले राजनीतिक लाभ–हानि का आकलन कर रहे हैं। इसलिए, इस FIR के बहाने विपक्षी गठबंधन की एकजुटता को नई मजबूती मिलेगी, इसकी संभावना फिलहाल कम दिखती है।

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