सोमनाथ मंदिर को लेकर नेहरू पर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी का बड़ा आरोप

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को कमजोर करने की कोशिश का दावा, सोशल मीडिया पोस्ट से गरमाई सियासत

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  • भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने नेहरू पर सोमनाथ मंदिर को लेकर नकारात्मक रुख अपनाने का आरोप लगाया
  • मंदिर के पुनर्निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का विरोध करने का दावा
  • कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
  • सोशल मीडिया मंच पर सिलसिलेवार पोस्ट कर ऐतिहासिक पत्रों का हवाला दिया

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 07 जनवरी: भाजपा के राज्यसभा सांसद एवं प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने सोमनाथ मंदिर को लेकर देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके सोशल मीडिया पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है।

आज़ाद भारत में सबसे नकारात्मक रुख का आरोप

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज़ाद भारत में सोमनाथ मंदिर के प्रति सबसे नकारात्मक दृष्टिकोण स्वयं पंडित नेहरू का रहा। उन्होंने दावा किया कि जहां इतिहास में विदेशी आक्रमणकारियों ने इस मंदिर को नुकसान पहुँचाया, वहीं स्वतंत्र भारत में इसके पुनर्निर्माण और प्रतीकात्मक महत्व को कमज़ोर करने का प्रयास हुआ।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र का ज़िक्र

भाजपा सांसद के अनुसार, 21 अप्रैल 1951 को पंडित नेहरू ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को पत्र लिखकर सोमनाथ मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक मान्यताओं को “पूरी तरह असत्य” बताया था। त्रिवेदी का आरोप है कि इस पत्र के माध्यम से भारत की सभ्यतागत स्मृतियों के बजाय बाहरी तुष्टीकरण को प्राथमिकता दी गई।

पुनर्निर्माण और उद्घाटन का विरोध

अपने दूसरे पोस्ट में सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पंडित नेहरू सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि नेहरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सहित अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों को पत्र लिखकर उद्घाटन समारोह से दूरी बनाए रखने की सलाह दी थी।

विदेशों में छवि बिगड़ने की आशंका का तर्क

त्रिवेदी के मुताबिक, पंडित नेहरू ने सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कहा था कि सोमनाथ मंदिर के निर्माण से विदेशों में भारत की छवि प्रभावित हो सकती है। उन्होंने तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री को प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की प्रचार-प्रसार गतिविधियाँ सीमित रखने के निर्देश भी दिए थे।

दूतावासों और ट्रस्ट को लेकर आरोप

भाजपा सांसद ने यह भी दावा किया कि नेहरू ने भारतीय दूतावासों को सोमनाथ ट्रस्ट को किसी भी प्रकार की सहायता देने से मना कर दिया था। पवित्र नदियों से जल मँगाने के प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया गया और राष्ट्रपति के सोमनाथ दौरे के प्रभाव को कम करने का प्रयास किया गया।

कांग्रेस की चुप्पी

इन आरोपों के बाद सोमनाथ मंदिर, नेहरू की धर्मनिरपेक्ष नीति और उस दौर के निर्णयों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। हालांकि, इस पूरे मामले पर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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