माघ मेला स्नान विवाद: शास्त्र, परंपरा और प्रशासन के बीच टकराव

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान विवाद पर संत समाज की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, अखाड़ा परिषद ने प्रशासन को दी क्लीन चिट

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  • माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम नोज पर स्नान से रोके जाने के बाद विवाद गहराया
  • जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने शास्त्रसम्मत आचरण पर जोर देते हुए शास्त्र-विरोधी कार्यों को अनुचित बताया
  • पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने सीधी टिप्पणी से परहेज किया, लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद के प्रति स्नेह जताया
  • अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने प्रशासन को क्लीन चिट देते हुए भविष्य में संयम की अपील की

समग्र समाचार सेवा
प्रयागराज | 21 जनवरी: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या के शाही स्नान के दौरान संगम नोज पर स्नान से रोके जाने और बाद में उनके धरने पर बैठने की घटना ने धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में व्यापक बहस छेड़ दी है। इस पूरे प्रकरण पर अब देश के प्रमुख संतों और शंकराचार्यों के बयान सामने आने लगे हैं।

पद्म विभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इस विवाद पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि शास्त्र के विरुद्ध किया गया कोई भी कार्य सुखद परिणाम नहीं देता। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं शास्त्र-विरोधी आचरण करता है, उसे न सुख मिलता है, न शांति और न ही सद्गति। उन्होंने यह भी बताया कि वह स्वयं हमेशा पैदल जाकर स्नान करते हैं, क्योंकि यही शास्त्रसम्मत और परंपरागत मार्ग है।

पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती की प्रतिक्रिया

वहीं, पुरी स्थित गोवर्धन मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने इस विवाद पर संयमित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर उनका निर्णय अकाट्य होता है और उसे सर्वोच्च न्यायालय तक मान्यता प्राप्त है, लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े इस विवाद पर उन्होंने फिलहाल कोई सीधी टिप्पणी करने से इनकार किया।

हालांकि, उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद को अपना “लाडला” बताते हुए उनके प्रति स्नेह जरूर व्यक्त किया। त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर में भक्तों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कोई मामला विधिवत उनके संज्ञान में नहीं आता, उस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है। उनके वक्तव्य और भाव-भंगिमा में अविमुक्तेश्वरानंद के प्रति नरमी और अप्रत्यक्ष समर्थन साफ झलका।

अखाड़ा परिषद ने प्रशासन को दी क्लीन चिट

उज्जैन में इस मामले पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में हुए पूरे घटनाक्रम के लिए प्रशासन को पूरी तरह क्लीन चिट दी। महंत हरि गिरि ने कहा, “गुरु बनाया जाता है, बनता नहीं” और शंकराचार्यों को समाज तथा 13 अखाड़ों की परंपराओं को समझने की सीख दी। उन्होंने घटना को दुखद बताते हुए प्रार्थना की कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

क्या था पूरा मामला

गौरतलब है कि मौनी अमावस्या के शाही स्नान के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम नोज पर स्नान से रोके जाने पर विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद उन्होंने मौके पर ही धरना देकर प्रशासनिक व्यवहार को शास्त्र और परंपरा के विरुद्ध बताया था। उनका आरोप था कि शंकराचार्यों के लिए निर्धारित मर्यादा और सम्मान का उल्लंघन किया गया।

विवाद तब और गहरा गया जब काशी के मणिकर्णिका घाट पर एक स्थापित मूर्ति को तोड़े जाने की घटना भी सामने आई, जिस पर कई संतों और धार्मिक संस्थाओं ने सवाल उठाए। पूरा प्रकरण अब धार्मिक परंपराओं, शास्त्रसम्मत आचरण और प्रशासनिक व्यवस्था के संतुलन को लेकर गंभीर बहस का विषय बन गया है।

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