‘विकसित भारत’ बनाम ‘सपनों का बजट’, केंद्रीय बजट पर बंटी राजनीतिक राय

अमित शाह ने बताया विकसित भारत का बजट, अखिलेश बोले– गरीब की समझ से बाहर

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  • बजट 2026 को लेकर सत्ता और विपक्ष के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएँ
  • अमित शाह ने बजट को ‘विकसित भारत’ का रोडमैप बताया
  • अखिलेश यादव ने रोजगार और महंगाई पर सवाल उठाए
  • शशि थरूर बोले– मिडिल क्लास, लोअर मिडिल क्लास और राज्यों के लिए कुछ नहीं

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 2 फ़रवरी: केंद्रीय बजट 2026-27 के पेश होते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए बजट को लेकर जहां सत्तापक्ष इसे विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष ने आम जनता की अनदेखी का आरोप लगाया है।

अमित शाह का समर्थन

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर बजट की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह बजट मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, पर्यटन, ग्रामीण विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, खेल और तीर्थ क्षेत्रों को मजबूती देता है।
अमित शाह के मुताबिक यह बजट देश के हर गांव, कस्बे और शहर के युवाओं, महिलाओं और किसानों के सपनों को पूरा करने की क्षमता रखता है।

अखिलेश यादव का हमला

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बजट 2026 को गरीब, किसान और गांवों में रहने वाले लोगों की समझ से बाहर बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट न तो गरीब का पेट भर सकता है और न ही रोजगार की ठोस गारंटी देता है। अखिलेश यादव ने इसे सपने दिखाने वाला बजट करार दिया।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया प्रगतिशील

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बजट का समर्थन करते हुए कहा कि यह एक प्रोग्रेसिव बजट है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर पर फोकस करता है। उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के लिए संस्थानों और जलमार्गों में किए गए प्रावधानों को खास तौर पर रेखांकित किया।

शशि थरूर की तीखी टिप्पणी

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बजट को लेकर सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बड़े मुद्दों के स्तर पर देखें तो इस बजट में न तो मिडिल क्लास के लिए कुछ है और न ही लोअर मिडिल क्लास के लिए। इसके साथ ही उन्होंने राज्यों के लिए भी किसी ठोस राहत के अभाव की बात कही।

सियासी तस्वीर साफ

कुल मिलाकर, बजट 2026-27 को लेकर राजनीतिक तस्वीर साफ तौर पर बंटी हुई नजर आ रही है। सरकार इसे विकास और भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार बता रही है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि बजट आम आदमी, रोजगार और राज्यों की जरूरतों को नजरअंदाज करता है।

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