पूनम शर्मा
राजनीतिक संदेश का केंद्र: घुसपैठ और पहचान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम के सोनितपुर की रैली में भाजपा के चुनावी एजेंडे को स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि जनता पार्टी को पाँच साल और देती है, तो अवैध घुसपैठ को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। यह बयान केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान, जमीन और जनसंख्या संतुलन से भी जुड़ा हुआ था।
जमीन और अतिक्रमण का बड़ा मुद्दा
रैली में शाह ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने अब तक 1.25 लाख एकड़ से अधिक जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। यह दावा असम में चल रहे भूमि विवादों और सरकारी बेदखली अभियानों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। भाजपा इस मुद्दे को “असम की जमीन बचाने” के रूप में पेश कर रही है, ताकि स्थानीय समुदायों के बीच राजनीतिक समर्थन मजबूत किया जा सके।
भाजपा की चुनावी रणनीति
भाजपा की रणनीति दो बड़े स्तंभों पर आधारित दिखाई देती है। पहला, विकास — जिसमें सड़क, स्वास्थ्य, निवेश, बाढ़ नियंत्रण और रोजगार शामिल हैं। दूसरा, पहचान — जिसमें घुसपैठ, सीमा सुरक्षा, जमीन और असमिया अस्मिता शामिल हैं।
अमित शाह ने पहले भी यह कहा है कि भाजपा के पहले कार्यकाल में घुसपैठ पर रोक लगाने की शुरुआत हुई, दूसरे कार्यकाल में अतिक्रमित जमीन वापस ली गई और तीसरे कार्यकाल में राज्य को बाढ़मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा जाएगा। इससे साफ है कि भाजपा चुनावी विमर्श को केवल विकास तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि भावनात्मक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी केंद्र में रखना चाहती है।
विपक्ष के सवाल और चुनौतियां
हालांकि, विपक्ष इस पूरे नैरेटिव पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि यदि सीमा सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और घुसपैठ रोकना केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो पिछले कई वर्षों में यह समस्या पूरी तरह खत्म क्यों नहीं हुई।
विपक्षी दलों का यह भी कहना है कि हर चुनाव में घुसपैठ का मुद्दा उठाना भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन गया है। उनका आरोप है कि भाजपा इस विषय को लगातार जिंदा रखकर ध्रुवीकरण की राजनीति करती है।
हिमंत सरकार की भूमिका
हिमन्त बिस्वा सरमा नेतृत्व वाली सरकार ने भूमि अतिक्रमण हटाने, अवैध निर्माण पर कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। भाजपा समर्थकों का मानना है कि राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में प्रशासनिक स्तर पर कई ठोस कदम उठाए हैं, जिससे पार्टी को ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत समर्थन मिला है।
चुनावी असर क्या हो सकता है
सोनितपुर की रैली ने यह संकेत दे दिया है कि भाजपा 2026 के चुनाव को “विकास बनाम विपक्ष” के साथ-साथ “पहचान बनाम घुसपैठ” के मुद्दे पर भी लड़ना चाहती है। आने वाले महीनों में यह विषय और अधिक तेज हो सकता है, क्योंकि असम की राजनीति में जमीन, पहचान और सुरक्षा हमेशा से बेहद संवेदनशील मुद्दे रहे हैं