असम चुनाव: भाजपा के संकल्प पत्र में विकास,पहचान और महिला वोट बैंक पर बड़ा दाँव

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पूनम शर्मा
असम विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी का संकल्प पत्र जारी कर दिया गया है। इस संकल्प पत्र के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट हो गया है कि अब चुनाव का फोकस केवल विकास पर ही नहीं, बल्कि पहचान, महिला वोट बैंक, और अन्य मुद्दों पर भी होगा। भारतीय जनता पार्टी का संकल्प पत्र जारी किए जाने के अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन , हिमन्त विस्व सरमा , सर्वानन्द सोनॉवल , और दिलीप सईकिया की मौजूदगी भारतीय जनता पार्टी को यह स्पष्ट कर देती है कि यह चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ने जा रही है।

महिलाओं को साधने के लिए सबसे बड़ी कोशिश

भारतीय जनता पार्टी के संकल्प पत्र का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा महिलाओं को साधने के लिए किए जाने वाले वादों का है। भारतीय जनता पार्टी का संकल्प पत्र में ओरुनोदोई योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि को बढ़ाने का वादा किया गया है।
असम विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी का संकल्प पत्र जारी कर दिया गया है। इस संकल्प पत्र के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट हो गया है कि अब चुनाव का फोकस केवल विकास पर ही नहीं, बल्कि पहचान, महिला वोट बैंक, और अन्य मुद्दों पर भी होगा। भारतीय जनता पार्टी का संकल्प पत्र जारी किए जाने के अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन , हिमन्त विस्व सरमा , सर्वानन्द सोनॉवल , और दिलीप सईकिया  की मौजूदगी भारतीय जनता पार्टी को यह स्पष्ट कर देती है कि यह चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ने जा रही है।

भारतीय जनता पार्टी के संकल्प पत्र का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा महिलाओं को साधने के लिए किए जाने वाले वादों का है। भारतीय जनता पार्टी का संकल्प पत्र में ओरुनोदोई योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि को बढ़ाने का वादा किया गया है।

अगर देखा जाए, यह मॉडल कुछ हद तक उन राज्यों की राजनीति से मिलता-जुलता है जहाँ महिलाओं के लिए सीधी नकद सहायता योजनाएँ  चुनावी तौर पर बेहद प्रभावी रही हैं। यही कारण है कि भाजपा इसी रणनीति को असम में एक मजबूत रूप देना चाहती है।

रोजगार और युवाओं के लिए बड़ा संदेश

असम में बेरोजगारी लंबे समय से बड़ा मुद्दा रही है। खासकर शिक्षित युवाओं के बीच सरकारी नौकरियों को लेकर नाराजगी और इंतजार दोनों बने रहे हैं। ऐसे में भाजपा ने अगले पांच वर्षों में 2 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा कर युवाओं को बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

इसके साथ ही पार्टी ने हर जिले में मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय और इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने की योजना भी रखी है। “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज” जैसा मॉडल सिर्फ शिक्षा या स्वास्थ्य का मामला नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय असमानता को कम करने का राजनीतिक संदेश भी देता है।

भाजपा यह दिखाना चाहती है कि गुवाहाटी और कुछ बड़े शहरों तक सीमित विकास की जगह अब जिलों तक अवसर पहुंचाने की कोशिश हो रही है। अगर यह वादा जमीन पर उतरता है, तो इससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के युवाओं को राज्य से बाहर जाने की मजबूरी कम हो सकती है।

बड़ा वादा: बाढ़ का मुद्दा

असम की राजनीति में बाढ़ का मुद्दा हमेशा  रहा है। यहाँ हर साल लाखों लोग बाढ़ के कारण प्रभावित होते हैं। भाजपा के संकल्प पत्र में 18 हजार करोड़ की बाढ़ नियंत्रण परियोजना का जिक्र किया है। भाजपा का दावा है कि वह असम को बाढ़ मुक्त बना देगी।

भाजपा के इस संकल्प पत्र के अनुमोदन के साथ ही, कुछ ऐसे वादे किए गए हैं जो केवल विकास कार्यों के होने तक ही सीमित नहीं हैं। इसमें यूनिफॉर्म सिविल कोड के रूप में जाने वाले यूसीसी के अनुमोदन के वादे के साथ-साथ एक ऐसे राज्य के रूप में जाने जाने वाले असम में ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों पर कार्रवाई के वादे किए गए हैं। यह एक पारंपरिक राजनीति है जिसमें भाजपा को सहायता मिलेगी, जो कि उसके मुख्य समर्थक वर्ग को मजबूत करने में सहायता करेगी।

आसम में पहचान, भूमि और जनसंख्या के मुद्दे हमेशा से ही एक संवेदनशील मुद्दे हैं। भाजपा इन्हीं मुद्दों के साथ विकास कार्यों को जोड़ने के लिए चुनावी संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

चुनावी दस्तावेज या राजनीतिक रणनीति?

भाजपा का दावा है कि इस संकल्प पत्र को तैयार करने के लिए राज्यभर से ढाई लाख से ज्यादा सुझाव लिए गए। इससे पार्टी इसे जनता की भागीदारी वाला दस्तावेज बताने की कोशिश कर रही है।

लेकिन असली चुनौती चुनाव जीतने के बाद इन वादों को पूरा करने की होगी। महिलाओं को आर्थिक सहायता, लाखों नौकरियां, मेडिकल कॉलेज, बड़े निवेश और बाढ़ नियंत्रण जैसे वादे जितने आकर्षक हैं, उतने ही कठिन भी हैं।

फिलहाल इतना साफ है कि भाजपा ने इस संकल्प पत्र के जरिए विकास, कल्याण और पहचान की राजनीति को एक साथ जोड़ने की कोशिश की है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इन वादों को कितना भरोसेमंद मानते हैं।

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