दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया के तहत बड़े नेताओं को नोटिस

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान डेटा में विसंगतियों और मैपिंग न होने के कारण लालकृष्ण आडवाणी, मनीष सिसोदिया सहित कई हस्तियों को मिले नोटिस।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
  • दिल्ली में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत 33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।
  • इस सूची में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जैसे कई दिग्गज नेता शामिल हैं।
  • चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का मतलब नाम काटना नहीं है, बल्कि दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 22 सितंबर: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया इन दिनों काफी चर्चा में है। मतदाता सूचियों को त्रुटिमुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए किए जा रहे इस अभियान के तहत दर्जनों प्रमुख राजनीतिक हस्तियों, वरिष्ठ अधिकारियों और मशहूर शख्सियतों को नोटिस जारी किए गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 33 लाख से अधिक मतदाताओं के विवरण में ‘तार्किक विसंगतियां’ (logical discrepancies) पाई गई हैं, जिसके बाद उन्हें ये नोटिस भेजे गए हैं।

किन कारणों से भेजे गए हैं ये नोटिस?

चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, घर-घर जाकर किए गए सत्यापन और भरे गए एन्यूमरेशन फॉर्म्स के दौरान कई प्रविष्टियों का मिलान वर्ष 2002 की पिछली एसआईआर मतदाता सूची से नहीं हो पाया है। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी (98), उनकी बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका के नाम पिछली सूची से मैपिंग न होने के कारण इस दायरे में आए हैं, हालांकि उनके बेटे जयंत का नाम इस प्रक्रिया में सुगमता से सत्यापित हो गया। इसी प्रकार, मनीष सिसोदिया और उनके परिवार के सदस्यों के फॉर्म्स में भी नाम या माता-पिता के विवरण में मामूली विसंगतियां पाई गई हैं। इस सूची में केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि कई सेवारत व सेवानिवृत्त नौकरशाह और शीर्ष सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं।

चुनाव आयोग की स्पष्ट सफाई: घबराने की जरूरत नहीं

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच उठी चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का मतलब यह कतई नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। यह केवल डेटा सुधार और सत्यापन का एक चरण है। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि बिना सुनवाई का अवसर दिए और उचित आदेश पारित किए बिना किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जा सकता है।

दस्तावेज जमा करने की अंतिम तिथि

जिन मतदाताओं को ये नोटिस प्राप्त हुए हैं, उन्हें अपने संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के समक्ष 29 अक्टूबर तक अपने वैध दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर आगामी 4 नवंबर 2026 को अंतिम और संशोधित मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। चुनाव आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे और सूची पूरी तरह साफ-सुथरी हो।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.