चुनाव आयोग विवाद पर गुलाम नबी आजाद का बड़ा बयान

मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर विपक्ष की मांग को डीपीएपी प्रमुख ने ठहराया सही, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल।

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  • डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची विवाद पर विपक्ष का समर्थन किया है।
  • उन्होंने कहा कि जब दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने आपत्तियां दर्ज कराई हैं, तो विपक्ष की दोबारा चुनाव कराने की मांग गलत नहीं है।
  • आजाद ने संसद में विपक्षी दलों से एकजुट होकर इस गंभीर मुद्दे को उठाने की पुरजोर अपील की है।

समग्र समाचार सेवा
अनंतनाग, 28 सितंबर: भारतीय राजनीतिक गलियारों में निर्वाचन आयोग (Election Commission) और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उपजा विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। इस बीच, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) के अध्यक्ष और देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। अनंतनाग में मीडिया से बातचीत करते हुए श्री आजाद ने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े किए और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विवाद के बीच विपक्षी दलों की मांगों का खुला समर्थन किया है।

“दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां गंभीर मामला”

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनावों की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के पास इसे साबित करने के लिए पुख्ता सबूत नहीं होते थे। इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है क्योंकि चुनाव आयोग के भीतर से ही मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के सामने कई बार अपनी औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। आजाद ने कहा कि जब आयोग के अंदर ही सदस्य फैसले पर सवाल उठा रहे हैं, तो जनता और राजनीतिक दलों को उन आपत्तियों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

पुनर्चुनाव की मांग और विपक्ष से एकजुट होने की अपील

अपने संबोधन में श्री आजाद ने यह भी सवाल उठाया कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने के बाद चुनाव संपन्न कराए गए, क्या उन चुनावों को वैध माना जाना चाहिए या फिर वहां दोबारा चुनाव होने चाहिए? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसी परिस्थितियों में विपक्ष द्वारा दोबारा चुनाव कराने की मांग को किसी भी हाल में गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने सभी विपक्षी दलों से आह्वान किया कि वे संसद के भीतर और बाहर इस गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर एकजुट हों तथा देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की शुचिता को बनाए रखने के लिए अपनी आवाज बुलंद करें।

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