अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन 30 सितंबर को दिल्ली में
भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश भर की उत्कृष्ट महिला किसानों को किया जाएगा सम्मानित।
- संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के तहत 30 सितंबर को नई दिल्ली में अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
- इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में होने वाले इस भव्य सम्मेलन में देश भर के विभिन्न राज्यों से हजारों महिला किसान कार्यकर्ता शामिल होंगी।
- इस दौरान कृषि, जैविक खेती, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला किसानों को सम्मानित किया जाएगा।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 28 सितंबर: वर्ष 2026 को संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किया गया है। इस महत्वपूर्ण वर्ष के उपलक्ष्य में कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान, उनकी प्रतिष्ठा और उनकी अटूट मेहनत को समाज के सामने एक किसान के रूप में स्थापित करने के लिए भारतीय किसान संघ द्वारा एक बड़े राष्ट्रीय आयोजन की तैयारी पूरी कर ली गई है। आगामी 30 सितंबर 2026, बुधवार को सुबह 9:00 बजे से नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम (के. डी. जाधव) में ‘अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में महिला किसान कार्यकर्ता भाग लेंगी।
उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला किसानों का होगा सम्मान
इस भव्य सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट और सराहनीय कार्य करने वाली महिला किसानों का सम्मान समारोह होगा। इस अवसर पर गौ कृषि वाणिज्यम्, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, बीज संरक्षण, पशुपालन, स्वरोजगार और खाद्य प्रसंस्करण जैसी विभिन्न महत्वपूर्ण श्रेणियों में देश भर से चयनित विशिष्ट महिला किसानों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार के सम्मान से ग्रामीण क्षेत्रों की अन्य महिलाओं को भी कृषि और आधुनिक तकनीकों से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।
कृषि रीढ़ हैं महिलाएं: बोआई से लेकर पशुपालन तक अहम भूमिका
आज के दौर में यदि भारतीय कृषि की रीढ़ की हड्डी की बात की जाए, तो महिलाएं उसमें सबसे आगे खड़ी नजर आती हैं। देश में बोआई, रोपाई, कटाई, खरपतवार नियंत्रण और पशुपालन जैसे 60 से 80 प्रतिशत कृषि कार्य अकेले महिलाओं द्वारा ही संभाले जाते हैं। वे पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक कृषि ज्ञान, देशी बीजों के संरक्षण और जैव विविधता को बचाए रखने में सबसे अहम भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा, गौ आधारित जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को धरातल पर उतारने में भी महिलाओं की अग्रणी भूमिका रही है। आज वे दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण हस्तशिल्प के माध्यम से अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।
बता दें कि भारतीय किसान संघ देश का सबसे बड़ा किसान संगठन है, जिसके देश भर के 60 हजार से अधिक गांवों में समितियां गठित हैं। इन समितियों में 42 लाख से अधिक महिला और पुरुष किसान कार्यकर्ता सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिनमें लगभग 7 लाख महिला किसान कार्यकर्ता शामिल हैं। संघ का मूल मंत्र “कृषिमित् कृषस्व-खेती ही करो” के साथ यह सम्मेलन देश के कृषि परिदृश्य में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।