समग्र समाचार सेवा
मुंबई ,5 अक्टूबर :भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक आज से शुरू हो गई है। बाजार और अर्थशास्त्रियों की निगाहें 7 अक्टूबर को आने वाले नीतिगत फैसले पर टिकी हैं। मौजूदा परिस्थितियों में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो लगभग चार वर्ष बाद RBI की ओर से पहली दर वृद्धि होगी।
रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 प्रतिशत पहुंच गई, जो लगातार तीसरे महीने RBI के 4 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर रही। महंगाई के दबाव के साथ-साथ रुपये पर दबाव और वैश्विक स्तर पर कुछ केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्त मौद्रिक नीति अपनाए जाने से RBI पर भी संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है। अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी। विनिर्माण और निवेश गतिविधियों में तेजी ने आर्थिक विकास को मजबूती दी है।
यदि RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो इसका प्रभाव बैंक ऋण, होम लोन, ऑटो लोन और कारोबारी कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, ऊंची ब्याज दरें महंगाई को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं और रुपये को स्थिर करने में भी भूमिका निभा सकती हैं।
बाजार के लिए RBI का रुख भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा जितना वास्तविक दर फैसला। यदि केंद्रीय बैंक महंगाई को लेकर चिंता जताता है तो आगे भी दरों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। इसके विपरीत यदि RBI मौजूदा दर को बरकरार रखता है और महंगाई में नरमी की उम्मीद जताता है तो बाजार को राहत मिल सकती है।