पूर्व आईपीएस भास्कर राव ने की ध्रुव राठी के वीजा की जांच की मांग
पूर्व आईपीएस अधिकारी भास्कर राव ने यूट्यूबर ध्रुव राठी के विदेशी निवास और वीजा स्टेटस की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
- कर्नाटक के पूर्व आईपीएस अधिकारी भास्कर राव ने केंद्रीय जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर यूट्यूबर ध्रुव राठी के जर्मनी में निवास, फंडिंग और वीजा स्टेटस की गहन जांच की मांग की है।
- राव का आरोप है कि ध्रुव राठी विदेश में रहकर भारतीय लोकतांत्रिक संस्थानों, चुनाव आयोग और संवैधानिक निकायों के खिलाफ भ्रामक व दुर्भावनापूर्ण एजेंडा चला रहे हैं।
- हाल ही में दिल्ली में हुए CJP प्रदर्शन और गिरफ्तारियों के बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी की इस मांग ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 10 अक्तूबर: देश की राजनीति और सोशल मीडिया जगत में उस समय एक नया भूचाल आ गया जब कर्नाटक के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भास्कर राव ने लोकप्रिय यूट्यूबर और राजनीतिक टिप्पणीकार ध्रुव राठी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भास्कर राव ने केंद्र सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों को औपचारिक पत्र लिखकर मांग की है कि ध्रुव राठी के जर्मनी में प्रवास, उनके वीजा स्टेटस, नागरिकता संबंधी दस्तावेजों और उनके ऑनलाइन चैनल्स को मिलने वाली विदेशी फंडिंग की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
पूर्व आईपीएस भास्कर राव के गंभीर आरोप
भास्कर राव ने अपने पत्र और बयानों में आरोप लगाया है कि कुछ सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स और यूट्यूबर जानबूझकर विदेशी जमीन से भारत के आंतरिक मामलों में दखल दे रहे हैं। उनका कहना है कि ध्रुव राठी अपने वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से देश के संवैधानिक संस्थानों, चुनाव आयोग, न्यायपालिका और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के खिलाफ सुनियोजित तरीके से दुष्प्रचार फैला रहे हैं। राव के अनुसार, इस प्रकार की गतिविधियों से देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल होती है और राष्ट्रीय सुरक्षा व शांति के लिए भी गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।
विदेशी फंडिंग और टैक्स ट्रेल की जांच पर जोर
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने अपनी मांग में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि देश के बाहर बैठकर बड़े पैमाने पर राजनीतिक नैरेटिव सेट करने वाले इन कंटेंट क्रिएटर्स की वित्तीय कड़ियों (Financial Trails) की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इन चैनल्स को वित्तीय सहायता कहाँ से मिल रही है और क्या विदेशी ताक़तें भारत की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए इन माध्यमों का इस्तेमाल कर रही हैं। जांच एजेंसियों से यह पता लगाने का आग्रह किया गया है कि क्या इन गतिविधियों में किसी प्रकार के विदेशी कानूनों या आव्रजन (Immigration) नियमों का उल्लंघन हुआ है।
हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और CJP प्रदर्शन से जुड़ाव
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आयोजित किए गए प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर राजधानी में हाई-अलर्ट घोषित किया गया है। इस प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस द्वारा ध्रुव राठी और कई अन्य कार्यकर्ताओं को नजरबंद या हिरासत में लेने की खबरें भी सामने आई थीं। जानकारों का मानना है कि ध्रुव राठी के खिलाफ पूर्व आईपीएस अधिकारी द्वारा उठाई गई यह मांग इस पूरे विवाद को एक नया मोड़ दे रही है, जहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विदेशी प्रभाव पर तीखी बहस छिड़ गई है।
सोशल मीडिया और कानूनी गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं
भास्कर राव की इस मांग के सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर दो स्पष्ट धड़े बन गए हैं। एक वर्ग जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता के हनन का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरा वर्ग राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के नाम पर विदेशी धरती से चलने वाले राजनीतिक एजेंडों पर सख्त कार्रवाई की वकालत कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केंद्र सरकार या कोई प्रमुख जांच एजेंसी इस मामले में औपचारिक रूप से संज्ञान लेकर कोई बड़ी जांच शुरू करती है या नहीं।