शिवराज चौहान ने आदिवासियों के मकान तोड़े जाने का किया विरोध, अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में वन विभाग द्वारा आदिवासियों के घर ढहाए जाने पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बिफरे, अपनी ही बीजेपी सरकार की कार्यशैली पर खड़े किए गंभीर सवाल।

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  • पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के सीहोर जिले में आदिवासियों के मकान ढहाए जाने और फसलें नष्ट किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है।
  • शिवराज चौहान ने अपनी पार्टी की राज्य सरकार (मोहन यादव सरकार) और प्रशासनिक अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा, “आदिवासियों के वोटों से ही मोहन जी मुख्यमंत्री बने हैं, उनके साथ ऐसा अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
  • केंद्रीय मंत्री खुद प्रभावित आदिवासी परिवारों के बीच पहुँचे, देर रात तक उनके साथ धरने पर बैठे और मुख्य सचिव (Chief Secretary) को फोन लगाकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।

समग्र समाचार सेवा

भोपाल, 12 अक्तूबर: मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय एक अभूतपूर्व और बड़ा सियासी मोड़ देखने को मिला जब राज्य के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके और वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार के खिलाफ आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा में सड़कों पर उतर आए। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गाँव में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर 12 आदिवासी परिवारों के मकानों को बुलडोजर से ढहा दिए जाने और उनकी फसलों को बर्बाद करने की घटना से नाराज ‘मामा’ शिवराज सिंह चौहान सीधे गांव पहुँचे और रात भर पीड़ितों के साथ धरने पर बैठकर अपनी ही सरकार के प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया।

‘आदिवासियों के वोटों से मोहन जी CM बने’: शिवराज चौहान का बड़ा हमला

प्रभावित कोसमी गाँव पहुँचे शिवराज सिंह चौहान का गुस्सा अधिकारियों की तानाशाही देखकर फूट पड़ा। बुलडोजर कार्रवाई में टूटे हुए मकानों, बिखरे हुए सामान और तबाह फसलों को देखकर केंद्रीय मंत्री भावुक हो गए। उन्होंने मीडिया और जनता के सामने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह अधिकारियों की एक बड़ी साजिश है जो सरकार और पार्टी को बदनाम करना चाहते हैं। हम गरीबों और आदिवासियों के वोटों के कारण चुनाव जीतते हैं, और इन्हीं आदिवासियों के वोटों से मोहन यादव जी राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। फिर गरीबों की बरसों की मेहनत पर इस तरह बुलडोजर कैसे चलाया जा सकता है?”

मुख्य सचिव को फोन और देर रात तक धरना

घटनास्थल पर मौजूद आदिवासियों के आंसुओं को पोंछते हुए शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को फोन लगाया और अपनी भारी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों और वन विभाग के कर्मचारियों ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए गरीबों के घर उजाड़े हैं और मिट्टी डालकर उनके कुओं को बंद किया है, उनके खिलाफ तत्काल निलंबन और अनुशासनात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए। शिवराज चौहान देर रात तक प्रभावित आदिवासियों के बीच जमीन पर बैठकर धरने पर बैठे रहे और आश्वासन दिया कि जब तक उन्हें न्याय और मुआवजा नहीं मिल जाता, वे चुप नहीं बैठेंगे।

विपक्षी दलों ने उठाया अंदरूनी कलह का मुद्दा

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपनी ही सरकार के खिलाफ खुले तौर पर रुख अपनाने के बाद राज्य का विपक्षी दल कांग्रेस भी हमलावर हो गया है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब बीजेपी के ही इतने वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अपनी सरकार में आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ सवाल उठा रहे हैं, तो इससे स्पष्ट होता है कि राज्य की मोहन यादव सरकार में प्रशासनिक अराजकता और अंदरूनी गुटबाजी किस स्तर तक पहुँच चुकी है। विपक्ष ने मांग की है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव को तुरंत इस मामले में जवाब देना चाहिए।

राजनीतिक गलियारों में गरमाई राजनीति

मध्य प्रदेश में मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही प्रशासनिक फैसलों को लेकर कई बार अंदरूनी मतभेद की खबरें आती रही हैं, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का इस तरह सार्वजनिक रूप से आदिवासी समाज के पक्ष में खड़े होकर अधिकारियों को आड़े हाथों लेना राज्य की राजनीति में एक बहुत बड़े सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। आदिवासियों के बीच ‘मामा’ के रूप में लोकप्रिय शिवराज चौहान ने साफ कर दिया है कि गरीबों के हक की लड़ाई में वे किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेंगे, भले ही राज्य में उनकी अपनी ही पार्टी की सरकार क्यों न हो।

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