फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों पर राष्ट्रपति मैक्रों का कड़ा रुख, बोले—‘गुस्सा और शर्मिंदगी’
2,400 गिरफ्तार, करीब 1,000 सुरक्षाकर्मी घायल.देशव्यापी हिंसा, आगजनी और लूटपाट के बाद फ्रांस में राजनीतिक संकट गहराया; राष्ट्रपति ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों को तत्काल सहायता देने का वादा किया
- फ्रांस में शनिवार को व्यापक हिंसा, आगजनी और लूटपाट के बाद लगभग 2,400 लोगों की गिरफ्तारी की सूचना।
- गृह मंत्रालय के अनुसार, झड़पों में करीब 1,000 पुलिस और जेंडार्मरी सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
- राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
- सरकार ने प्रभावित नागरिकों की तत्काल सहायता के लिए संकट प्रबंधन इकाई बनाने की घोषणा की, लेकिन आपातकाल या कर्फ्यू लागू नहीं किया।
समग्र समाचार सेवा
पेरिस, 19 अक्टूबर : फ्रांस में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट के खिलाफ शुरू हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के हिंसक रूप लेने के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शनिवार को देशभर में आगजनी, तोड़फोड़, लूटपाट और सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों के बाद रविवार को राष्ट्र के नाम टेलीविजन संबोधन में मैक्रों ने घटनाओं पर गहरा गुस्सा और शर्मिंदगी जताई।
राष्ट्रपति ने हिंसक प्रदर्शनकारियों पर फ्रांसीसी गणराज्य को अस्थिर करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा और लूटपाट में शामिल लोगों को अपने अपराधों के लिए जवाबदेह होना पड़ेगा।
अल जज़ीरा की 18 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के गृह मंत्रालय ने शनिवार की हिंसा के सिलसिले में लगभग 2,400 लोगों की गिरफ्तारी और करीब 1,000 पुलिसकर्मियों तथा जेंडार्मरी सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी है।
‘गणराज्य को गिराने का प्रयास’—मैक्रों की चेतावनी
रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति मैक्रों ने हिंसक घटनाओं को फ्रांस की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की वैध मांगों और हिंसा करने वालों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना आवश्यक है।
मैक्रों ने कहा कि जिन लोगों ने संपत्तियों को नष्ट किया, तोड़फोड़ की और दुकानों को लूटा, उन्हें कानून के अनुसार अपने कृत्यों के परिणाम भुगतने होंगे।
राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा को एक-दूसरे के विरुद्ध नहीं खड़ा किया जाना चाहिए।
शनिवार को कई शहरों में भड़की हिंसा
17 अक्टूबर को फ्रांस के विभिन्न शहरों में हुए प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
राजधानी पेरिस में दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लूटपाट हुई। कुछ स्थानों पर आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं।
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के दौरान सुरक्षा बलों को भीड़ नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।
शनिवार की हिंसा को हाल के वर्षों में फ्रांस में हुई सबसे गंभीर शहरी अशांति की घटनाओं में से एक बताया जा रहा है।
2,400 गिरफ्तार, लगभग 1,000 सुरक्षाकर्मी घायल
फ्रांस के गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शनिवार की घटनाओं के संबंध में लगभग 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
वहीं करीब 1,000 पुलिस और जेंडार्मरी सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
ये आंकड़े पहले सामने आई प्रारंभिक रिपोर्टों से काफी अधिक हैं, जिनमें गिरफ्तारियों और घायल पुलिसकर्मियों की संख्या कम बताई गई थी।
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि अनेक शहरों में सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों को अभूतपूर्व हिंसा का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान सुरक्षाकर्मियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए सरकार को घटनाओं की विस्तृत समीक्षा करने का निर्देश दिया।
छात्रों के आंदोलन से देशव्यापी विरोध तक
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर छात्रों के आंदोलन के रूप में हुई थी।
छात्र संगठनों ने विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अपर्याप्त वित्तीय सहायता, खराब बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की गंभीर कमी को लेकर विरोध शुरू किया।
इसके बाद ‘येलो वेस्ट’ या जिले जॉन आंदोलन से जुड़े समूह भी प्रदर्शनों में शामिल हो गए।
इन समूहों ने महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों और सरकारी खर्च में कटौती जैसी आर्थिक नीतियों के खिलाफ अपनी पुरानी मांगों को छात्र आंदोलन से जोड़ दिया।
इस प्रकार स्थानीय शैक्षणिक समस्याओं से शुरू हुआ विरोध व्यापक सामाजिक और आर्थिक असंतोष का रूप लेने लगा।
पीड़ितों की सहायता के लिए संकट प्रबंधन इकाई
राष्ट्रपति मैक्रों ने घोषणा की कि हिंसा से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए विशेष संकट प्रबंधन इकाई बनाई जाएगी।
इसका उद्देश्य उन नागरिकों और कारोबारियों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है, जिन्हें आगजनी, तोड़फोड़ या लूटपाट के कारण नुकसान हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शनिवार की घटनाओं से आवश्यक सबक लेगी और भविष्य में ऐसी हिंसा रोकने के लिए सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा करेगी।
हालांकि, राष्ट्रपति ने देश में आपातकाल लगाने या कर्फ्यू लागू करने की घोषणा नहीं की।
विपक्ष ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार
फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।
वामपंथी राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार जां-लुक मेलेंशों ने हिंसा के दौरान हुई तबाही के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है।
दूसरी ओर, दक्षिणपंथी नेता जॉर्डन बार्डेला ने राष्ट्रपति मैक्रों के संबोधन को निराशाजनक और कमजोर बताया।
बार्डेला ने कहा कि सरकार फ्रांस के नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने में भी सक्षम नहीं दिखाई दे रही है।
दोनों नेताओं की आलोचनाएं अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोणों से आई हैं, लेकिन इनमें सरकार की संकट प्रबंधन क्षमता पर सवाल उठाए गए हैं।
2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक दबाव
फ्रांस में अगले वर्ष राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। ऐसे समय में व्यापक जनअसंतोष और हिंसक प्रदर्शनों ने राजनीतिक वातावरण को और संवेदनशील बना दिया है।
विभिन्न राजनीतिक दल प्रदर्शनों के कारणों और सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर अपने-अपने दृष्टिकोण सामने रख रहे हैं।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों की सभी मांगों को किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा से जोड़ना उचित नहीं होगा। आंदोलन में छात्रों, आर्थिक नीतियों से असंतुष्ट नागरिकों और अलग-अलग संगठनों की भागीदारी रही है।
क्या केवल सुरक्षा बढ़ाने से समाप्त होगा संकट?
अल जज़ीरा की पेरिस संवाददाता नताशा बटलर के अनुसार, राष्ट्रपति का संबोधन अपेक्षित था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इससे प्रदर्शनकारियों का असंतोष कम होगा।
प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग का कहना है कि वे राष्ट्रपति के ऐसे आश्वासन पहले भी सुन चुके हैं और अब ठोस बदलाव चाहते हैं।
यही फ्रांस सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
एक ओर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी शिकायतों का समाधान भी महत्वपूर्ण है।
फ्रांस की ताजा घटनाएं दर्शाती हैं कि जब आर्थिक असंतोष, छात्रों की नाराजगी और राजनीतिक अविश्वास एक साथ सामने आते हैं, तो उनका प्रभाव व्यापक राष्ट्रीय संकट के रूप में दिखाई दे सकता है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने देशवासियों से एकता, शांति और परस्पर सम्मान बनाए रखने की अपील की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फ्रांसीसी सरकार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की वैध मांगों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देती है।