दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा 20 अफगानी सिखों को मिली भारतीय नागरिकता

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!

दिल्ली, 17अगस्त। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) 2019 के तहत 20 अफगानी सिखों की नागरिकता अर्जियों को मंजूरी देकर उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान की है। यह निर्णय अफगानिस्तान से आए शरणार्थी सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और जनरल सेक्रेटरी सरदार जगदीप सिंह काहलो ने बताया कि नागरिकता संशोधन कानून 2019 के तहत उन लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से हिंदू, सिख, पारसी, बौद्ध, जैन समुदाय के हैं और भारत में शरणार्थी के रूप में आए हैं। मार्च 2024 में गृह मंत्री अमित शाह ने इस कानून के तहत नागरिकता प्राप्त करने के इच्छुक लोगों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया की घोषणा की थी।

शरणार्थियों के लिए विशेष केंद्र का संचालन

सरदार कालका और सरदार काहलो ने बताया कि दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने गणेश नगर में एक विशेष केंद्र की स्थापना की, जहां अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए सिख समुदाय के लोगों को पंजीकरण में सहायता प्रदान की जाती है। खालसा दीवान के सहयोग से यह केंद्र बड़ी संख्या में शरणार्थियों की मदद कर रहा है। अब तक इस केंद्र के माध्यम से 400 से अधिक अर्जियाँ पंजीकृत की गई हैं, जिनमें से 20 अफगानी सिखों को नागरिकता मिल चुकी है।

भारतीय नागरिकता के साथ नए अधिकार

नागरिकता प्राप्त करने वाले इन 20 सिखों को अब भारत के नागरिकों के सभी अधिकार प्राप्त हो गए हैं। उनके बच्चों को भी शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सभी सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, उन्हें आधार कार्ड, पासपोर्ट, और अन्य आवश्यक दस्तावेज भी प्रदान किए जाएंगे। दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने जिला मजिस्ट्रेट स्तर पर भी इस मामले को उठाया है ताकि शेष अर्जियों को भी जल्द से जल्द निपटारा किया जा सके।

भारत सरकार का आभार

दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भारत सरकार के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल को लागू किया और सिख समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता दिलाने में सहायता की।

 

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.