नई दिल्ली ,5 मई 2025 –भारत ने पाकिस्तान के उत्पादों को तीसरे देशों के माध्यम से भारतीय बाजार में पहुँचने से रोकने के लिए अपनी निगरानी व्यवस्था और कड़ी कर दी है। सरकार के मुताबिक, लगभग 500 मिलियन डॉलर (करीब 4,150 करोड़ रुपये) मूल्य के पाकिस्तानी उत्पाद — जैसे फल, सूखे खजूर, कपड़े, सोडा ऐश, सेंधा नमक और चमड़े की वस्तुएं — संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, इंडोनेशिया और श्रीलंका जैसे देशों में रीपैकेज और रीलैबल होकर भारतीय बाजार में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
कस्टम विभाग को इन गतिविधियों को रोकने के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है। सरकार ने 2 मई को सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष पाकिस्तानी आयातों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया। यह आदेश हाल ही में कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमले के बाद लिया गया, जिसमें 26 पर्यटकों की जान गई थी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत-पाकिस्तान के बीच आधिकारिक व्यापार पहले से ही नगण्य है, लेकिन पाकिस्तानी सामान तीसरे देशों के जरिए भारत पहुंच रहे थे। इसीलिए नए प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि इन अप्रत्यक्ष रास्तों को भी बंद किया जा सके।
2019 के पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) का दर्जा वापस ले लिया था और पाकिस्तानी आयातों पर 200% सीमा शुल्क लगा दिया था, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग रुक गया था। 2020-21 में पाकिस्तान से आयात 2.39 मिलियन डॉलर था, जो 2024-25 में घटकर मात्र 0.42 मिलियन डॉलर रह गया।
नए आदेश के तहत, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने स्पष्ट किया है कि सभी पाकिस्तानी उत्पादों पर, चाहे वे सीधे आएं या किसी तीसरे देश से, प्रतिबंध लागू होगा। यह आदेश राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक नीति के हित में लिया गया है और किसी भी अपवाद के लिए भारत सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।
2023-24 में भारत ने पाकिस्तान से केवल 3 मिलियन डॉलर मूल्य के कृषि उत्पादों का आयात किया, जबकि पाकिस्तान ने भारत से 1.2 बिलियन डॉलर मूल्य का आयात किया, जिसमें दवाइयां, रसायन, चीनी, ऑटो पार्ट्स और पेट्रोलियम उत्पाद शामिल थे। 2018-19 में द्विपक्षीय व्यापार चरम पर था, जब भारत ने पाकिस्तान को 2.07 बिलियन डॉलर का निर्यात किया और 495 मिलियन डॉलर का आयात किया।
भारतीय एजेंसियां अब यूएई, सिंगापुर, इंडोनेशिया और श्रीलंका जैसे देशों से आने वाले सामान की कड़ी निगरानी कर रही हैं ताकि पाकिस्तानी उत्पादों की रीपैकेजिंग और रीलैबलिंग के जरिए बाजार में प्रवेश रोका जा सके।
सरकार का मानना है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से ही नाजुक है, और यह कदम उसके निर्यात को झटका देने के लिए उठाया गया है। सरकार ने साफ कहा है कि “आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते”।