साइबर धोखाधड़ी पर लगेगा लगाम? वित्त मंत्रालय ने कंपनियों से कहा – लाएँ साइबर बीमा कवर  

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समग्र समाचार  सेवा                                                                                                                                                                                                                              नई दिल्ली, 2 जून :भारत में डिजिटल लेन-देन की बढ़ती रफ्तार के साथ ही साइबर धोखाधड़ी के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसी के मद्देनज़र वित्त मंत्रालय ने बीमा कंपनियों को आदेश दिया है कि वे उपभोक्ताओं को साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए विशेष बीमा कवर उपलब्ध कराएं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों से आग्रह किया है कि वे उभरते जोखिमों जैसे साइबर अपराधों को ध्यान में रखते हुए नए और प्रभावी बीमा उत्पाद विकसित करें। उन्होंने कहा कि बीमा उद्योग को अब पारंपरिक दायरों से बाहर निकलकर डिजिटल युग की चुनौतियों के अनुसार अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करना चाहिए।

आंकड़ों में डराने वाली सच्चाई

आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में चार गुना वृद्धि हुई है। इससे देश को लगभग 177 करोड़ रुपये (करीब 20 मिलियन डॉलर) का नुकसान हुआ है। खास बात यह है कि ₹1 लाख या उससे अधिक की राशि वाले मामलों की संख्या 6,699 से बढ़कर 29,082 हो गई है। यह ट्रेंड वित्तीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

साइबर बीमा क्यों है जरूरी?

साइबर धोखाधड़ी बीमा कवर से उपभोक्ताओं को आर्थिक क्षति की स्थिति में राहत मिलेगी। इससे न केवल उपभोक्ता जागरूकता बढ़ेगी बल्कि कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बीमा उत्पादों के साथ-साथ साइबर सुरक्षा में निवेश और डिजिटल साक्षरता को भी प्राथमिकता देनी होगी।

वित्त मंत्रालय की यह पहल डिजिटल भारत को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है। अगर बीमा कंपनियां प्रभावी और व्यापक साइबर बीमा योजनाएं लाती हैं, तो उपभोक्ताओं को आर्थिक धोखाधड़ी से काफी हद तक सुरक्षा मिल सकती है।

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