तमिलनाडु CM स्टालिन का उद्धव-राज ठाकरे को समर्थन: हिंदी थोपने के खिलाफ एकजुटता का आह्वान
एम.के. स्टालिन ने बीजेपी पर साधा निशाना, महाराष्ट्र से सबक लेने की दी सलाह।
समग्र समाचार सेवा
चेन्नई , 7 जुलाई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने हिंदी भाषा को थोपने के विरोध में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के विरोध प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया है। स्टालिन ने मुंबई में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में आयोजित “विजय रैली” को लेकर अपनी उत्सुकता व्यक्त की, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंदी थोपने का विरोध करना था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी थोपने के खिलाफ तमिलनाडु में कई पीढ़ियों से चला आ रहा संघर्ष अब महाराष्ट्र तक फैल गया है, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।
बीजेपी पर स्टालिन का तीखा हमला
एम.के. स्टालिन ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की फंडिंग के लिए बीजेपी ने तमिलनाडु में हिंदी को अनिवार्य तीसरी भाषा बनाने की शर्त रखी थी। उन्होंने कहा कि बीजेपी को महाराष्ट्र में भी इसी तरह के जन आक्रोश का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उन्हें अपने कदम पीछे हटाने पड़े, जबकि वहां उनकी सरकार है। स्टालिन ने केंद्र सरकार से दो तीखे सवाल पूछे:
उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे हिंदी भाषी राज्यों में तीसरी भाषा के रूप में क्या पढ़ाया जाता है?
जब हिंदी भाषी राज्य स्वयं पिछड़े हुए हैं, तो प्रगतिशील गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी क्यों थोपी जा रही है?
स्टालिन ने इन सवालों के माध्यम से बीजेपी की भाषा नीति पर सवाल उठाए और भाषाई समानता का मुद्दा उठाया।
निधि रोके जाने का मुद्दा और सांस्कृतिक विविधता की रक्षा
मुख्यमंत्री स्टालिन ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि क्या वह समग्र शिक्षा अभियान के तहत तमिलनाडु में बच्चों की शिक्षा के लिए रोके गए ₹2,152 करोड़ के फंड को जारी करने के अपने रुख में बदलाव करेगी। उन्होंने इन निधियों को तत्काल जारी करने की मांग की, जिसे वे तमिलनाडु का कानूनी अधिकार मानते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तमिलनाडु में हिंदी थोपने के खिलाफ संघर्ष केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि बौद्धिक और तार्किक है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करना है। स्टालिन ने कहा कि विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान ही भारत की वास्तविक शक्ति है।
भाषाई भेदभाव के खिलाफ चेतावनी
स्टालिन ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि तमिलनाडु भाषाई भेदभाव, तमिल भाषा की उपेक्षा और किझड़ी जैसी प्राचीन सभ्यताओं की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी अपने ‘विश्वासघात’ के लिए प्रायश्चित नहीं करती है, तो तमिलनाडु उन्हें एक ‘अविस्मरणीय सबक’ सिखाएगा। यह बयान दर्शाता है कि तमिलनाडु भाषा के मुद्दे पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं है और अपनी भाषाई तथा सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यह एकजुटता का आह्वान देश के संघीय ढांचे में भाषाई विविधता के महत्व को रेखांकित करता है।