RSS की प्रांत प्रचारक बैठक संपन्न: शताब्दी वर्ष की भव्य तैयारी, समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगा संघ
केशव कुंज दिल्ली में आयोजित बैठक में समाज के सद्भाव और राष्ट्र निर्माण पर जोर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक 06 जुलाई 2025 को संपन्न हुई।
शताब्दी वर्ष (2025) की व्यापक योजना पर चर्चा हुई, जिसमें ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में हिंदू सम्मेलन शामिल हैं।
संघ ने धर्मांतरण को गलत बताया और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा का समर्थन किया।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 7 जुलाई: नई दिल्ली के केशव कुंज में 04 से 06 जुलाई 2025 तक आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में पूजनीय सरसंघचालक जी और माननीय सरकार्यवाह जी का मार्गदर्शन सभी कार्यकर्ताओं को प्राप्त हुआ। बैठक के समापन के बाद, केशव कुंज में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने मीडिया को बैठक से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि इस तीन दिवसीय सत्र में संघ के कार्य विस्तार, शताब्दी वर्ष की योजनाओं और विभिन्न प्रांतों में चल रहे कार्यों व अनुभवों पर गहन चर्चा हुई।
शताब्दी वर्ष की भव्य योजना: व्यापक आउटरीच का लक्ष्य
सुनील आंबेकर जी ने बताया कि बैठक का मुख्य केंद्रबिंदु संघ के शताब्दी वर्ष (2025) की विस्तृत योजना पर चर्चा करना था। शताब्दी वर्ष के दौरान, संघ का लक्ष्य समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना है। इसके तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में मंडल स्तर पर और शहरी क्षेत्रों में बस्ती स्तर पर विशाल हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। वर्तमान में, देश भर में संघ की 58,964 मंडल और 44,055 बस्तियां सक्रिय हैं, जहां ये सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों में समाज के उत्सवों, सामाजिक एकता और सद्भाव, साथ ही पंच परिवर्तन (पर्यावरण, परिवार मूल्य, सामाजिक समरसता आदि) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा।
इसी प्रकार, समाज में सद्भाव और समरसता को बढ़ावा देने के लिए 11,360 खंडों/नगरों में सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संघ रचना के अनुसार, देश के 924 जिलों में प्रमुख नागरिक गोष्ठियों का भी आयोजन होगा। इन गोष्ठियों में समूह, व्यवसाय और वर्ग के अनुसार ‘भारत का विचार’, ‘भारत का गौरव’ और ‘भारत का स्व’ जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा की जाएगी, ताकि समाज के हर वर्ग में राष्ट्र चेतना जागृत हो सके।
‘सर्वसमावेशी, सर्वस्पर्शी’ गृह संपर्क अभियान
सुनील आंबेकर जी ने एक वृहद गृह संपर्क अभियान की भी घोषणा की। इस अभियान के तहत, हर गांव और हर बस्ती के अधिकतम घरों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शताब्दी वर्ष के सभी कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य व्यापक आउटरीच है, जिसका अर्थ है भौगोलिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से समाज के सभी लोगों तक पहुंचना और उन्हें संघ के कार्यों में सहभागी बनाना। उन्होंने कहा, “यह अभियान एक तरह से सर्वसमावेशी, सर्वस्पर्शी होगा।” शताब्दी वर्ष का औपचारिक शुभारंभ इस साल विजयादशमी उत्सव से होगा। देशभर में आयोजित होने वाले विजयादशमी उत्सवों में सभी स्वयंसेवक बढ़-चढ़कर शामिल होंगे, जो इस अभियान की शुरुआत का प्रतीक होगा।
प्रगति का सर्वांगीण स्वरूप और पंच परिवर्तन
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि देश आर्थिक और तकनीकी दृष्टि से आगे बढ़ रहा है, लेकिन केवल यही प्रगति पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज की विशेषताएं, राष्ट्र के अपने विशेष गुणों के साथ ही समाज के सभी लोगों की चिंता करना, पर्यावरण की रक्षा करना, परिवार में जीवन मूल्यों को बनाए रखना और सामाजिक जीवन में आपसी सद्भाव बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इन बिंदुओं को ‘पंच परिवर्तन’ का हिस्सा बताया और कहा कि इन विषयों को शताब्दी वर्ष के सभी कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में ले जाया जाएगा। उनका मानना है कि यदि समाज इन विचारों को अपनाता है और उनमें सहभागी होता है, तो हमारी प्रगति एकतरफा नहीं होगी, बल्कि यह सर्वसमावेशी होगी और सबको साथ लेकर आगे बढ़ेगी।
मणिपुर की स्थिति और प्रशिक्षण वर्ग
बैठक में समाज जीवन के विभिन्न समसामयिक विषयों पर भी चर्चा हुई। सुनील जी ने विशेष रूप से मणिपुर की वर्तमान स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्वयंसेवकों द्वारा वहां किए जा रहे कार्य और सामाजिक सद्भाव के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा हुई। स्वयंसेवकों के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं, जहां स्वयंसेवक दोनों पक्षों से बात कर रहे हैं और शांति स्थापित करने में मदद कर रहे हैं। सीमावर्ती प्रांतों से आए कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभवों और वहां की कार्य स्थिति के बारे में जानकारी दी, जिसमें संघ कार्यकर्ताओं द्वारा स्थानीय लोगों को संगठित करने और उनकी कठिनाइयों को दूर करने के लिए किए जा रहे निरंतर कार्य पर प्रकाश डाला गया।
प्रशिक्षण वर्गों के बारे में जानकारी देते हुए सुनील जी ने बताया कि अप्रैल से जून 2025 तक देश भर में कुल 100 प्रशिक्षण वर्गों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इनमें से 40 वर्ष से कम आयु वर्ग के स्वयंसेवकों के लिए आयोजित 75 वर्गों में 17,609 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसी प्रकार, 40 से 60 वर्ष की आयु के लिए आयोजित 25 वर्गों में 4,270 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। इन प्रशिक्षण वर्गों में देश के 8,812 विभिन्न स्थानों से स्वयंसेवकों की उत्साहजनक सहभागिता रही, जो संघ के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।
धर्मांतरण और भाषा पर संघ का रुख
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पूछे गए एक महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में सुनील आंबेकर जी ने धर्मांतरण के मुद्दे पर संघ का स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि “लालच, जबरदस्ती, मजबूरी का लाभ उठाकर, और षड्यंत्र करके कन्वर्जन करना गलत है।” यह बयान संघ के उस मूल विचार को दर्शाता है जिसमें धर्म परिवर्तन के लिए अनुचित साधनों के उपयोग का विरोध किया जाता है।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में, भाषा के संबंध में संघ की नीति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि “भारत की सभी भाषाएं राष्ट्र भाषाएं हैं।” उन्होंने आगे कहा कि संघ का मानना है कि प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य रूप से मातृभाषा में ही होनी चाहिए। यह बयान भाषाई विविधता के प्रति संघ के सम्मान और मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करता है।
इस अवसर पर दिल्ली प्रांत संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल जी, अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख द्वय नरेंद्र ठाकुर जी और प्रदीप जोशी जी भी उपस्थित रहे।