संसद का मानसून सत्र 2025: पहले ही दिन जोरदार हंगामा, लोकसभा स्थगित
'ऑपरेशन सिंदूर', ट्रंप के दावे और बिहार वोटर लिस्ट पर विपक्ष का वार
- हंगामेदार शुरुआत: संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया, जिससे कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
- प्रमुख मुद्दे: विपक्ष ने पहलगाम आतंकी हमले, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर प्रधानमंत्री के बयान और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर तत्काल चर्चा की मांग की।
- सरकार का रुख: प्रधानमंत्री ने सत्र को ‘विजयोत्सव’ बताया, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में 100% सफलता का जिक्र किया; सरकार सभी मुद्दों पर नियमानुसार चर्चा के लिए तैयार।
कुमार राकेश
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2025: आज संसद का मानसून सत्र हंगामेदार तरीके से शुरू हुआ। सत्र के पहले दिन ही लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्षी दलों ने विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। विपक्ष ने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों और बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण की मांग की।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर घमासान, ट्रंप के दावे पर सवाल
लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्ष के सदस्यों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर तत्काल चर्चा की मांग को लेकर भारी हंगामा किया। विपक्ष का आरोप है कि अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराया और इस दौरान “पांच जेट” गिराए गए। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने सदन में बोलने की अनुमति न मिलने पर आरोप लगाया कि उन्हें ‘दो शब्द’ भी कहने नहीं दिए जा रहे। उन्होंने पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया और ‘5 जेट के सच’ पर जवाब मांगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र शुरू होने से पहले मीडिया से बात करते हुए इस मानसून सत्र को ‘विजयोत्सव’ बताया। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर जोर देते हुए कहा कि भारत ने आतंकियों के आकाओं के घर में घुसकर 22 मिनट के भीतर अपने लक्ष्य को 100% हासिल किया। उन्होंने ‘मेड इन इंडिया’ हथियारों के इस्तेमाल पर भी गर्व व्यक्त किया। हालांकि, विपक्ष की मांग है कि प्रधानमंत्री स्वयं सदन में इस संवेदनशील मुद्दे पर बयान दें, जबकि सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस पर विस्तृत बयान दे सकते हैं।
पहलगाम आतंकी हमला: श्रद्धांजलि के बाद हंगामा
सत्र की शुरुआत पहलगाम आतंकी हमले और अहमदाबाद विमान दुर्घटना के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में सदस्यों ने मौन रहकर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि के बाद, विपक्षी सांसदों ने तत्काल पहलगाम आतंकी हमले पर चर्चा की मांग की। विपक्ष का कहना है कि यह हमला देश की सुरक्षा में गंभीर चूक है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए कि कैसे आतंकवादियों ने इस तरह की वारदात को अंजाम दिया। हालांकि, सरकार का कहना है कि वह हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन नियमानुसार ही कार्यवाही चलेगी।
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर भी बवाल
बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर भी संसद में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं, और यह सत्तारूढ़ गठबंधन को लाभ पहुंचाने की एक ‘साजिश’ है। आरजेडी जैसे दलों ने इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ करार दिया।
हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अद्यतन करने और त्रुटिहीन बनाने के लिए है। आयोग के अनुसार, ‘ट्रेस नहीं हो पाए’ या मृत/शिफ्ट हो चुके मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है। नए नियमों के तहत, नए मतदाताओं और स्थानांतरित होने वाले मतदाताओं को कुछ अतिरिक्त घोषणाएं करनी होंगी, जिससे सत्यापन प्रक्रिया मजबूत होगी। लेकिन विपक्ष इसे नागरिक अधिकारों का हनन बताकर संसद में इसे जोर-शोर से उठा रहा है।
सदन में टकराव जारी, विधेयकों पर नजर
पहले दिन के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष के सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करते रहे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह सदन में सुचारू कार्यवाही चाहती है और सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों से सहयोग की अपील की।
इस मानसून सत्र में सरकार का लक्ष्य कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करना भी है, जिनमें नया आयकर विधेयक 2025 प्रमुख है, जिसका उद्देश्य कर कानूनों को सरल बनाना है। इसके अतिरिक्त, जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक सहित कई अन्य विधेयक भी चर्चा और पारित होने के लिए सूचीबद्ध हैं। यह देखना होगा कि राजनीतिक टकराव के बीच सदन विधायी कार्यों को कितना आगे बढ़ा पाता है।