सीबीआई ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारी को 232 करोड़ रुपए की गबन के आरोप में किया गिरफ्तार

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  • केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के एक वरिष्ठ प्रबंधक को 232 करोड़ रुपये के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया है।
  • आरोपी ने देहरादून एयरपोर्ट पर तैनाती के दौरान इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स में हेरफेर कर सरकारी धन को अपने निजी खातों में स्थानांतरित किया।
  • यह मामला सरकारी संस्थानों की वित्तीय प्रणाली और डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसके बाद सीबीआई ने जांच तेज कर दी है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 31 अगस्त, 2025: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के एक वरिष्ठ प्रबंधक को 232 करोड़ रुपए के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि देहरादून एयरपोर्ट पर तैनाती के दौरान उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से एएआई के फंड में हेराफेरी की और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स में हेरफेर कर सरकारी धन को निजी खाते में स्थानांतरित किया।

सीबीआई ने एएआई की शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया। गिरफ्तार अधिकारी की पहचान राहुल विजय के रूप में हुई है। जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2019-20 से लेकर 2022-23 के बीच आरोपित ने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स से छेड़छाड़ की। इस दौरान उन्होंने डुप्लीकेट और फर्जी एसेट्स तैयार किए तथा कई संपत्तियों के मूल्यों को कृत्रिम रूप से बढ़ाया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बार रकम में सिर्फ शून्य जोड़कर उसका मूल्य बढ़ा दिया गया ताकि नियमित जांच में हेराफेरी का पता न चल सके।

सीबीआई ने बताया कि आरोपित ने गबन की गई रकम अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर की। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि बाद में यह राशि ट्रेडिंग खातों में भेज दी गई ताकि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग कर निजी लाभ कमाया जा सके।

जांच के सिलसिले में 28 अगस्त को सीबीआई ने आरोपी के जयपुर स्थित आवासीय और कार्यालय परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

यह मामला एएआई जैसी प्रतिष्ठित संस्था की वित्तीय प्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार, फिलहाल आरोपी से विस्तृत पूछताछ की जा रही है और यह जांच भी की जा रही है कि क्या इस गबन में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल थे।

गौरतलब है कि बीते कुछ वर्षों में सरकारी संस्थाओं में वित्तीय हेराफेरी और फर्जीवाड़े के मामले लगातार सामने आए हैं। ऐसे मामलों में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स और डिजिटल लेन-देन का गलत इस्तेमाल सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से संस्थानों की साख पर असर पड़ता है और आम जनता का भरोसा डगमगाता है। इसलिए आवश्यक है कि वित्तीय प्रणाली की निगरानी और तकनीकी जांच को और मजबूत किया जाए।

232 करोड़ रुपए का यह गबन मामला अब सीबीआई की विशेष टीम की निगरानी में है और संभावना है कि आने वाले दिनों में इससे जुड़ी और परतें खुलेंगे

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