जयपुर SMS अस्पताल अग्निकांड: ICU में आग से 8 मरीजों की मौत
- 8 मरीजों की दर्दनाक मौत: जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर स्थित न्यूरो आईसीयू वार्ड में भीषण आग लगने से 8 मरीजों की मौत हो गई।
- लापरवाही का आरोप: मृतकों के परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही और समय पर कार्रवाई न करने का गंभीर आरोप लगाया है।
- जांच समिति गठित: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना पर दुख जताते हुए कारणों और सुरक्षा उपायों की समीक्षा के लिए छह सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
समग्र समाचार सेवा
जयपुर, 6 अक्टूबर, 2025: राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में रविवार देर रात करीब 11 बजकर 20 मिनट पर भीषण अग्निकांड हुआ। यह आग ट्रॉमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर बने न्यूरो आईसीयू वार्ड के पास एक स्टोर रूम में शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई और तेजी से फैल गई। इस वार्ड में भर्ती 11 गंभीर मरीजों में से 8 की दम घुटने और आग की चपेट में आने से मौत हो गई।
आईसीयू वार्ड में आग लगने से कांच के सील्ड स्ट्रक्चर के कारण कुछ ही मिनटों में जहरीला धुआं भर गया, जिससे वहां मौजूद कोमा में और वेंटिलेटर सपोर्ट पर चल रहे मरीजों को निकालना बेहद मुश्किल हो गया। अस्पताल प्रशासन ने पुष्टि की है कि हादसे में 3 महिलाओं सहित 8 मरीजों की जान चली गई, जबकि 5 अन्य मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है।
परिजनों का गंभीर आरोप: ‘स्टाफ ने मरीजों को मरने के लिए छोड़ा’
इस हृदय विदारक घटना के बाद मृतकों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि आग लगने से करीब 20 मिनट पहले ही स्टोर रूम से चिंगारी और धुआं उठना शुरू हो गया था, जिसकी सूचना उन्होंने वार्ड बॉय और नर्सिंग स्टाफ को दी थी, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
एक मृतक के परिजन ने आरोप लगाया, “हमने चिल्ला-चिल्लाकर बताया कि धुआं निकल रहा है, लेकिन डॉक्टर और कंपाउंडर वहां से भाग गए। जब तक हम मरीजों को निकालने की कोशिश करते, धुआं इतना घना हो गया कि अंधेरे में कुछ दिख नहीं रहा था।” परिजनों ने यह भी दावा किया कि आईसीयू में आग बुझाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं थे। कई तीमारदारों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों को ट्रॉली और बेड सहित बाहर निकाला, लेकिन गंभीर मरीजों को बचाया नहीं जा सका।

देवदूत बने पुलिसकर्मी, सरकार ने दिए जांच के आदेश
जहां एक ओर अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगे, वहीं दूसरी ओर एसएमएस पुलिस थाने के तीन पुलिसकर्मियों, हरिमोहन, ललित और वेदवीर ने बहादुरी का परिचय दिया। इन पुलिसकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना जलते वार्ड में कूदकर एक दर्जन से अधिक मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। धुएं की चपेट में आने के बाद इन तीनों को भी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
इस घटना पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहरा दुख व्यक्त किया और देर रात अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सोमवार को ही छह सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है, जो अग्निकांड के कारणों, अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में खामियों और स्टाफ की भूमिका की विस्तृत समीक्षा करेगी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अन्य नेताओं ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा प्रोटोकॉल और फायर सेफ्टी ऑडिट की आवश्यकता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।