कैथोलिक पादरी की अपील: हैलोवीन से दूर रहें

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  • आस्था के साथ असंगति: पादरी डेनियल फर्नांडिस के अनुसार, हैलोवीन अंधेरे और मृत्यु को गौरवान्वित करता है, जो ईसाई धर्म और ऑल सेंट्स डे (All Saints’ Day) की भावना के खिलाफ है।
  • ओझा विद्या का संकेत: त्योहार के प्रतीकों, जैसे ओइजा बोर्ड, आत्माओं को बुलाने और मज़ाकिया रस्मों में ओझा विद्या (जादू-टोना) के तत्व शामिल होते हैं।
  • ‘ट्रिक ऑर ट्रीट’ पर आध्यात्मिक चेतावनी: पादरी ने ‘ट्रिक ऑर ट्रीट’ को शैतान का मज़ाक बताया, जो ईसाइयों को ‘हानिरहित उल्लास’ में हिस्सा लेने का झांसा देकर उनकी आत्माओं को भटकाता है।

समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 31 अक्टूबर: मुंबई के एक वरिष्ठ कैथोलिक पादरी ने चर्च जाने वालों और जिमखानों से 31 अक्टूबर को होने वाले हैलोवीन (Halloween) समारोहों से बचने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यह त्योहार अंधेरे, डर और ओझा विद्या (occult) को महिमामंडित करता है, इसलिए यह कैथोलिक आस्था के साथ असंगत है। पादरी ने कहा कि हैलोवीन बच्चों को राक्षसों या भूतों के रूप में कपड़े पहनने की अनुमति देकर अच्छाई और बुराई के बीच की आध्यात्मिक लड़ाई को तुच्छ बनाता है।

🙏 पादरी ने कहा – ‘बुराई का महिमामंडन’

जोगेश्वरी स्थित इन्फैंट जीसस चर्च के एसोसिएट पादरी फादर डेनियल फर्नांडिस ने कहा कि हैलोवीन के प्रतीक, वेशभूषा और अनुष्ठान अक्सर पवित्र चीज़ों का उपहास करते हैं और जो पापपूर्ण है, उसे सामान्य बनाते हैं। उन्होंने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि कई जिमखाना, संस्थान और सामाजिक क्लब हैलोवीन को स्वीकार कर रहे हैं और उसे बढ़ावा भी दे रहे हैं।

फादर फर्नांडिस के अनुसार, हैलोवीन की थीम – भूत, कब्रिस्तान और प्रेत आत्माएँ – मृत्यु के प्रति एक आकर्षण का प्रतिनिधित्व करती हैं जो मसीह के मुक्तिदायक प्रकाश से पूरी तरह अलग है। उन्होंने कहा कि जादू-टोना, टोना-टोटका, या नेक्रोमेंसी (मृतकों से संवाद) की प्रथा के खिलाफ धर्मग्रंथों की चेतावनी है।

फादर फर्नांडिस ने चेतावनी दी कि चुड़ैलों, भूतों, राक्षसों या दानवों के रूप में कपड़े पहनना प्रकाश और अंधेरे के बीच की रेखाओं को धुंधला करता है। उन्होंने चर्च जाने वालों से आग्रह किया कि वे 1 नवंबर को ‘ऑल सेंट्स डे’ की पवित्रता को ध्यान में रखें, जो हैलोवीन से ठीक पहले मनाया जाता है।

⛪ जिमखानों ने भी हैलोवीन से किया किनारा

यह मुद्दा केवल चर्च तक सीमित नहीं है। कैथोलिक जिमखाना के एक सदस्य इयान परेरा ने बताया कि उनका जिमखाना लगभग आठ से दस साल पहले इस तरह के आयोजन करता था, लेकिन धार्मिक चिंताओं के चलते इसे बंद कर दिया गया। परेरा ने कहा, “हमारा मानना ​​था कि खून टपकाते पिशाचों (vampires) के रूप में कैथोलिकों का आना धार्मिक मान्यताओं से मेल नहीं खाता।”

हैलोवीन के स्थान पर, जिमखाना अब 1 नवंबर को ‘एन्जिल्स नाइट’ (देवदूतों की रात) का आयोजन करेगा। पादरी फर्नांडिस ने भी माता-पिता से आग्रह किया कि बच्चों को भूत या दानव के रूप में तैयार होने देना, मंत्रों और प्रेतवाधित घरों की बातें करना, अच्छाई और बुराई के बीच की आध्यात्मिक लड़ाई को महत्वहीन बना देता है। उनका यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत के महानगरों में हैलोवीन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

पादरी ने इस बात पर जोर दिया कि ईसाई समुदाय को अंधेरे का मनोरंजन करने के बजाय मसीह के प्रकाश पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, विशेष रूप से उस समय जब वे अपने प्रिय संतों (सन्त-सन्तियाँ) को याद करने के लिए तैयार हो रहे हैं। यह बयान मुंबई के कैथोलिक समुदाय के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करता है, जो पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच अपनी धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

 

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