जेल में ‘छोटे सरकार’, मैदान में ललन सिंह

हत्या के आरोप में गिरफ्तार उम्मीदवार के लिए केंद्रीय मंत्री खुद प्रचार करने उतरे

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समग्र समाचार सेवा
पटना, 3 नवंबर: मोकामा की सियासत एक बार फिर सुर्खियों में है,और इस बार वजह है जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह की गिरफ्तारी। दुलारचंद यादव हत्या मामले में गिरफ्तार बाहुबली नेता को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी ने उनसे दूरी बनाने के बजाय, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को उनके प्रचार की जिम्मेदारी सौंप दी है।

यानी, एक तरफ पार्टी “साफ सियासत” का नारा देती है, और दूसरी तरफ हत्या के आरोप में बंद अपने उम्मीदवार के लिए पूरे सरकारी संसाधन और सियासी ताकत झोंक देती है।

ललन सिंह 3 नवंबर को पूरे दिन मोकामा के गांवों,पंडारक, कन्हाईपुर, मोर, बरहपुर, शिवनार, छत्रपुर और मोकामा नगर परिषद,में जाकर अनंत सिंह के लिए वोट मांगेंगे।

लेकिन अब सवाल ये है की
क्या जेडीयू के पास वाकई योग्य और स्वच्छ छवि वाले प्रत्याशी खत्म हो गए हैं कि अब “बाहुबली ब्रांड” पर ही भरोसा करना पड़ रहा है?

30 अक्टूबर को मोकामा के तातार इलाके में दो उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच हुई झड़प में दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी। शुरुआती जांच में अनंत सिंह की मौजूदगी और आचार संहिता उल्लंघन की बात सामने आई। इसके बावजूद पार्टी का रुख ढुलमुल है।

अनंत सिंह 2005 से इस सीट के गढ़ माने जाते है, पांच बार विधायक रह चुके हैं, और 2020 में राजद टिकट पर जीते थे। बाद में दोषी ठहराए जाने के बाद उनकी सदस्यता खत्म हुई, और 2022 में उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव जीतकर वही परंपरा जारी रखी।

अब सवाल उठता है
क्या मोकामा की राजनीति हर बार एक ही चेहरे और एक ही डर की राजनीति पर निर्भर रहेगी?
क्या बिहार की जनता फिर से जेल की सलाखों से निकलने वाली उम्मीद पर भरोसा करेगी, या इस बार बदलने का साहस दिखाएगी?

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