यमुना तट पर 2000 महिलाओं ने की ‘महाशक्ति आराधना’
भारत के वीर सपूतों को श्रद्धांजलि और मातृशक्ति के जागरण के लिए ऐतिहासिक आयोजन
- दिल्ली के यमुना तट स्थित वासुदेव घाट पर विश्व मांगल्य सभा और दिल्ली सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा महाशक्ति आराधना का भव्य आयोजन किया गया।
- इस ऐतिहासिक अवसर पर 2000 से अधिक महिलाओं ने हाथों में दीपक लेकर एक स्वर में महिषासुर मर्दिनी स्त्रोत का गायन किया।
- कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत की रक्षा और राष्ट्र निर्माण में सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी वीर बलिदानियों को श्रद्धा सुमन अर्पित करना था।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 17 नवंबर: रविवार की शाम, दिल्ली के यमुना तट पर नवनिर्मित वासुदेव घाट एक अभूतपूर्व दृश्य का साक्षी बना, जब विश्व मांगल्य सभा और दिल्ली सरकार के सांस्कृतिक एवं भाषा विभाग के तत्वावधान में महाशक्ति आराधना का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य उन सभी वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देना था जिन्होंने भारत की संस्कृति, संस्कार, परंपरा और सीमाओं की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया है और शौर्य की गाथा गाई है।
शाम 4 बजे से 6 बजे तक चले इस कार्यक्रम में जब 2000 से अधिक महिलाओं ने अपने हाथों में जलते दीपक लेकर माँ जगदंबा के महिषासुर मर्दनी स्त्रोत के ‘ए गिरि नंदिनी, नंदित मेदनी’ पाठ का गायन शुरू किया, तो यमुना मैया की लहरें भी जीवंत हो उठीं। गणेश वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसमें भारत माता राष्ट्र मंदिर के संस्थापक अजय भाई जी ने भजन प्रस्तुत किए।
मातृशक्ति: राष्ट्र निर्माण की आधारशिला
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, विश्व मांगल्य सभा की अखिल भारतीय संगठन मंत्री डॉ. वृषाली जोशी ने संगठन के ध्येय का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि विश्व मांगल्य सभा गत 15 वर्षों से मातृ निर्माण के तत्व पर कार्य कर रही है, जिसका उद्देश्य परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए एक महिला की मूलभूत भूमिका को पुनः परिभाषित करना है। ‘मातृ’ शब्द की शक्ति समझाते हुए उन्होंने रामायण काल का उदाहरण दिया, जब माता सीता ने रावण से कहा था कि वह घास के एक पत्ते से भी उसका अंत कर सकती हैं।
डॉ. जोशी ने कहा कि मातृशक्ति ही छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप जैसे वीर पुत्रों को जन्म देकर देश की अस्मिता को तेजस्वी योगदान देती है। उन्होंने बताया कि संगठन पूरे भारतवर्ष में 7 लाख महिलाओं के बीच 11 विभागों में कार्य कर रहा है, जिसमें स्वास्थ्य परिषद के तहत अनाथ बच्चों को ‘स्वनाथ’ नाम देकर उन्हें एक माँ देने के उद्देश्य से कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने बताया ‘सनातन शेरनी’
कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने मातृशक्ति को देश की वास्तविक शक्ति बताते हुए कहा कि ‘महिला’ वह है जिसे कोई आसुरी शक्ति हिला नहीं सकती। उन्होंने कहा कि जब एक नारी किसी कार्य का प्राण (निश्चय) कर लेती है, तो उसके सामने कोई ठहर नहीं सकता। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का नेतृत्व करने वाली महिला अफसरों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर महिला में घर, समाज और राष्ट्र की रक्षा करने का पूरा सामर्थ्य है।
दिल्ली सरकार के सांस्कृतिक मंत्री कपिल मिश्रा ने इसे मातृशक्ति जागरण का कार्यक्रम बताते हुए कहा कि यमुना किनारे जुटी हजारों महिलाओं ने आतंकवादियों को करारा चांटा मारा है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि “भले तुम बम फोड़ो मगर हम सनातन शेरनियां नहीं डरने वाले।” उन्होंने कहा, “तुम भले कट्टरपंथी पढ़े लिखे दहशतगर्द पैदा करो मगर हम राष्ट्र धर्म निभायेंगे और भारत माता के सपूत शिवाजी ही पैदा करेंगे।”
वरिष्ठ समाज सेविका किरण चोपड़ा ने मातृशक्ति को शक्ति स्वरूपा बताते हुए संगठन के प्रयासों की सराहना की और कहा कि संस्कारों वाली मां-बेटी का निर्माण ही राष्ट्र निर्माण का असली काम है। कार्यक्रम में भारत सरकार के केंद्रीय राज्य परिवहन एवं वाणिज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, विश्व मांगल्य सभा के मार्गदर्शक प्रशांत हड़तालकर और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन भावपूर्ण यमुना आरती के साथ हुआ।