नेहरू को बदनाम करना सत्ताधारी वर्ग का मुख्य एजेंडा, सोनिया गांधी का केंद्र पर हमला

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  • सोनिया गांधी ने आरोप लगाया,  सत्ता पक्ष का प्रमुख एजेंडा नेहरू की बदनामी
  • कहा, नेहरू को संदर्भ से काटकर पेश करने की बढ़ रही प्रवृत्ति
  • स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण में योगदान न देने वाली विचारधारा पर निशाना
  • राजनाथ सिंह के हालिया बयान के संदर्भ में भी अप्रत्यक्ष पलटवार

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 6 दिसंबर: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर जवाहरलाल नेहरू की विरासत को मिटाने और उन्हें बदनाम करने के प्रयासों का गंभीर आरोप लगाया है। दिल्ली में आयोजित ‘नेहरू केंद्र भारत’ के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि आज एक सुनियोजित अभियान के तहत नेहरू को उनके ऐतिहासिक संदर्भ, चुनौतियों और समय से काटकर दिखाया जा रहा है, ताकि आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में उनकी भूमिका को छोटा किया जा सके।

सोनिया गांधी ने कहा, “यह स्वाभाविक है कि पंडित नेहरू जैसे महान व्यक्तित्व की आलोचना और विश्लेषण होते रहें, लेकिन आज जो प्रवृत्ति दिख रही है, वह उन्हें विकृत रूप में पेश करने की कोशिश है। उनके प्रति अपमान, तिरस्कार और बदनामी का अभियान चलाया जा रहा है, जो अस्वीकार्य है।”

इनकी विचारधारा का स्वतंत्रता आंदोलन में कोई योगदान नहीं — सोनिया गांधी

सत्ता पक्ष पर सीधे आरोप लगाते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि वे ताकतें, जो आज शासन में हैं, दशकों से नेहरू की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रही थीं।

उन्होंने कहा,
“यह वही विचारधारा है जिसका स्वतंत्रता आंदोलन में कोई योगदान नहीं था, न ही संविधान निर्माण में। इन लोगों ने संविधान की प्रतियां जलाई थीं और उसका खुला विरोध किया था। आज भी महात्मा गांधी के हत्यारों की पूजा इनके अनुयायी करते हैं।”

नेहरू की बदनामी सत्ताधारी वर्ग का मुख्य एजेंडा

सोनिया गांधी ने दो टूक कहा कि यह सिर्फ छवि धूमिल करने का प्रयास नहीं, बल्कि भारतीय गणराज्य की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक नींव को कमजोर करने की कोशिश है।

उन्होंने कहा,
“इनका लक्ष्य सिर्फ नेहरू को मिटाना नहीं, बल्कि उस नींव को उखाड़ना है जिस पर यह राष्ट्र खड़ा हुआ। हमें व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से इस प्रोजेक्ट का मुकाबला करना होगा—नेहरू की स्मृति के प्रति ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति यह हमारा दायित्व है।”

राजनाथ सिंह के बयान पर अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया

कुछ दिनों पहले गुजरात के कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दावा किया था कि जवाहरलाल नेहरू सरकारी खर्चे पर बाबरी मस्जिद बनाना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने उन्हें रोका। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि सोनिया गांधी का यह कड़ा बयान कहीं न कहीं उसी आरोप का जवाब है।

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