मानवाधिकार दूर का सपना नहीं, दैनिक जीवन की आवश्यकता हैं: वी. रामसुब्रमण्यन
एनएचआरसी अध्यक्ष ने मानवाधिकार दिवस पर कहा सम्मान, न्याय और समानता भारत की सांस्कृतिक आत्मा में निहित मूल्य हैं
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पर्यावरण, संघर्ष और आतंकवाद को बताया मानव गरिमा के लिए बड़ी चुनौती
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नागरिकों से “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना को अपनाने की अपील
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली। 10 दिसंबर: मानवाधिकार दिवस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन ने कहा कि मानवाधिकार कोई दूर की सोच नहीं हैं। ये हमारे दैनिक जीवन की मूल आवश्यकता हैं।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्रता का अधिकार मिलना चाहिए। यह केवल कानूनी शब्द नहीं, बल्कि जीवन को गरिमामय बनाने का आधार है।
उन्होंने याद दिलाया कि दुनिया ने 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाया था। भारत ने भी इस घोषणा को आकार देने में अहम भूमिका निभाई थी।
इस वर्ष का विषय “मानवाधिकार, हमारी दैनिक आवश्यकताएं” हमें यह समझाता है कि अधिकार भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छ पर्यावरण और समान अवसरों से जुड़े होते हैं।
न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, संघर्ष और आतंकवाद जैसी चुनौतियाँ मानव गरिमा को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में देशों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि न्याय और समानता की भावना मजबूत बनी रहे।
उन्होंने बताया कि एनएचआरसी पिछले तीन दशकों से कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा, जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से एक सुरक्षित माहौल बनाने के लिए काम कर रहा है।
उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि हम सभी अपने व्यवहार में सम्मान, संवेदना और न्याय को शामिल करें। यही मानवाधिकारों की असली ताकत है।