चैतन्य बघेल को 250 करोड़ की अवैध कमाई, 3800 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में EOW-ACB और ED की जाँच में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को सिंडिकेट का नियंत्रक और अंतिम निर्णय लेने वाला बताया गया है।
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ईओडब्ल्यू ने 3800 पन्नों की आठवीं चार्जशीट रायपुर की विशेष अदालत में दाख़िल की
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चैतन्य बघेल को 200 से 250 करोड़ रुपये की अवैध राशि मिलने का दावा
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आबकारी विभाग में अवैध वसूली सिंडिकेट को संरक्षण देने का आरोप
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घोटाले की कुल राशि 3 हज़ार करोड़ से अधिक, आगे 3500 करोड़ पार करने की आशंका
समग्र समाचार सेवा
रायपुर | 23 दिसंबर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW-ACB) ने रायपुर की विशेष अदालत में लगभग 3800 पन्नों की आठवीं चार्जशीट दाख़िल की है। यह चार्जशीट आबकारी विभाग में कथित भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और धनशोधन से जुड़े आरोपों पर आधारित है।
चैतन्य बघेल पर लगे मुख्य आरोप
EOW का दावा है कि शराब घोटाले से चैतन्य बघेल को 200 से 250 करोड़ रुपये की अवैध आय हुई। जाँच एजेंसी के अनुसार वे केवल लाभार्थी नहीं थे, बल्कि पूरे शराब सिंडिकेट के संरक्षक और नियंत्रक की भूमिका में थे।
शराब सिंडिकेट कैसे काम करता था
जाँच में सामने आया कि आबकारी विभाग के भीतर एक संगठित वसूली तंत्र सक्रिय था। इसके माध्यम से डिस्टलरी संचालकों से कमीशन लिया गया, नकली होलोग्राम वाली शराब सरकारी दुकानों से बेची गई और बिक्री को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया।
अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका
चार्जशीट के मुताबिक़ अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास जैसे अधिकारी और अनवर ढेबर, अरविंद सिंह, विकास अग्रवाल जैसे कारोबारी सिंडिकेट के संचालन में शामिल थे। चैतन्य बघेल इन सभी के बीच समन्वय बिठाने और दिशा-निर्देश देने का कार्य करते थे।
A, B और C श्रेणी में घोटाले का मॉडल
A श्रेणी में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी कमीशन लिया गया।
B श्रेणी में नकली होलोग्राम लगाकर अतिरिक्त शराब सरकारी दुकानों से बिकवाई गई।
C श्रेणी में शराब की बिक्री को जानबूझकर सरकारी दस्तावेज़ों से बाहर रखा गया।
अवैध राशि की आवाजाही
EOW और ED के अनुसार, सिंडिकेट से इकट्ठी की गई अवैध राशि को भरोसेमंद लोगों के माध्यम से ऊँचे स्तर तक पहुँचाया गया। इसके लिए बैंकिंग चैनलों के साथ-साथ नकद लेन-देन का भी इस्तेमाल किया गया।
रियल एस्टेट में निवेश का मामला
ED का दावा है कि शराब घोटाले से प्राप्त धन को चैतन्य बघेल ने अपनी फर्म बघेल डेवलपर्स के माध्यम से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ‘विठ्ठल ग्रीन’ में लगाया। जाँच में लागत कम दिखाने, नकद भुगतान करने और अवैध धन को वैध रूप देने की कोशिश के संकेत मिले हैं।
घोटाले की कुल राशि
अब तक की जाँच में शराब घोटाले की राशि लगभग 3074 करोड़ रुपये आँकी गई है। जाँच एजेंसियों का मानना है कि आगे यह आँकड़ा 3500 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकता है।
किसे कितना पैसा मिलने का दावा
EOW चार्जशीट के अनुसार घोटाले की राशि का बड़ा हिस्सा नेताओं, मंत्रियों, डिस्टलरी संचालकों, कारोबारियों और आबकारी विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों में बाँटा गया।
गिरफ़्तारी और अब तक की कार्रवाई
चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को गिरफ़्तार किया गया था और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। ED ने सौम्या चौरसिया और पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को भी गिरफ़्तार किया है। कई आरोपियों की संपत्तियाँ कुर्क की जा चुकी हैं।
क़ानूनी धाराएँ और जाँच का आधार
मामला भारतीय दंड संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज किया गया है। EOW-ACB की FIR के आधार पर ED समानांतर जाँच कर रही है।
जाँच एजेंसियों का निष्कर्ष
जाँच एजेंसियों का कहना है कि शराब घोटाला पूरी तरह संगठित और योजनाबद्ध था, जिससे राज्य सरकार के ख़ज़ाने को भारी नुक़सान पहुँचा और अवैध कमाई को रियल एस्टेट के ज़रिये छिपाने की कोशिश की गई।