महिलाओं के लिए स्मार्टफोन पर रोक, पंचायत के फैसले से मचा हड़कंप
राजस्थान के जालौर में 15 गांवों की बहू-बेटियों पर कैमरे वाले मोबाइल के इस्तेमाल पर पाबंदी, 26 जनवरी से लागू होगा आदेश
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पंचायत ने महिलाओं के स्मार्टफोन और कैमरे वाले मोबाइल पर पूरी तरह रोक लगाई
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केवल कॉल सुविधा वाले की-पैड मोबाइल रखने की अनुमति
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शादी-समारोह, सामाजिक कार्यक्रम और पड़ोस जाने पर भी मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित
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पढ़ाई कर रही बच्चियों को घर के भीतर सीमित उपयोग की छूट
समग्र समाचार सेवा
जालौर | 24 दिसंबर: राजस्थान के जालौर जिले से सामने आए एक पंचायत निर्णय ने पूरे इलाके में चर्चा और असहजता पैदा कर दी है। सुंधामाता पट्टी से जुड़े चौधरी समाज की पंचायत ने 15 गांवों की महिलाओं के लिए स्मार्टफोन और कैमरे वाले मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है यह आदेश 26 जनवरी से प्रभावी होगा।
पंचायत के फैसले के तहत बहू-बेटियाँ अब केवल साधारण की-पैड मोबाइल ही रख सकेंगी। इतना ही नहीं, किसी भी सामाजिक कार्यक्रम, शादी-विवाह या पड़ोस में जाने के दौरान मोबाइल फोन साथ ले जाने की भी मनाही होगी। पंचायत के इस कदम को लेकर समाज में समर्थन और विरोध—दोनों तरह की आवाज़ें उठने लगी हैं।
पंचायत बैठक में कैसे बना नियम
यह फैसला गाजीपुर गांव में आयोजित चौधरी समाज की बैठक में लिया गया। बैठक में सुंधामाता पट्टी से जुड़ी 14 पट्टियों के प्रतिनिधि और समाज के पंच मौजूद रहे। चर्चा के दौरान मोबाइल फोन के बढ़ते चलन और उसके पारिवारिक-सामाजिक असर पर बात हुई। लंबे विचार-विमर्श के बाद प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।
किन बातों पर लगाई गई रोक
पंचायत के आदेश के अनुसार, इन गांवों की महिलाएँ स्मार्टफोन या कैमरे वाले मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकेंगी। केवल कॉल करने वाले साधारण मोबाइल रखने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा किसी भी सार्वजनिक या पारिवारिक कार्यक्रम में मोबाइल ले जाना भी नियमों के खिलाफ माना जाएगा। यह व्यवस्था सभी 15 गांवों में समान रूप से लागू होगी।
छात्राओं को सीमित राहत
हालांकि पंचायत ने पढ़ाई कर रही बच्चियों के लिए आंशिक छूट का प्रावधान रखा है। शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए वे घर के अंदर मोबाइल का इस्तेमाल कर सकेंगी, लेकिन बाहर जाते समय या सामाजिक आयोजनों में मोबाइल ले जाने की अनुमति उन्हें भी नहीं होगी। पंचायत का कहना है कि यह छूट केवल पढ़ाई तक सीमित रहेगी।
पंचायत ने क्या बताई वजह
पंचायत के अनुसार, महिलाओं के स्मार्टफोन इस्तेमाल के कारण छोटे बच्चों में मोबाइल देखने की आदत बढ़ रही है, जिससे उनकी सेहत और आँखों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। पंचायत का मानना है कि यह कदम बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखने में मदद करेगा।
हालांकि, इस फैसले को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ लोग इसे सामाजिक अनुशासन से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई लोग इसे महिलाओं की आज़ादी और निजी फ़ैसलों पर अनुचित हस्तक्षेप बता रहे हैं। पंचायत का यह आदेश अब सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े सामाजिक विमर्श का विषय बन चुका है।