भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा धर्मांतरण : डॉ. अश्विनी उपाध्याय
पं. गणेश प्रसाद मिश्र की स्मृति में राष्ट्रीय सुरक्षा पर नौंवी व्याख्यानमाला आयोजित
समग्र समाचार सेवा
छतरपुर। 29 दिसंबर: पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर पं. गणेश प्रसाद मिश्र की स्मृति में नौंवी व्याख्यानमाला का आयोजन रविवार को छत्रसाल ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. अश्विनी उपाध्याय रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विनोद रावत ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि प्राचीन भारतीय इतिहासकार डॉ. कन्हैया लाल अग्रवाल रहे।
न्यास अध्यक्ष डॉ. राकेश मिश्र ने प्रस्तावना रखते हुए सेवा न्यास की गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। कमलकांत उर्फ बॉबी असाटी ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर डॉ. रचना मिश्रा की पुस्तक “प्रबोध चंद्रोदय का सांस्कृतिक अध्ययन” का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन नीरज भार्गव ने किया।
धर्मांतरण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
मुख्य वक्ता डॉ. अश्विनी उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के लिए आज सबसे बड़ा खतरा धर्मांतरण है। उन्होंने कहा कि यह कोई स्वतः होने वाली प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अपराध है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा को कमजोर कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लव जेहाद, लैंड जेहाद और अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देने में धर्मांतरित लोगों की भूमिका सामने आती है।

डॉ. उपाध्याय ने कहा कि इतिहास में मुगलों ने तलवार के बल पर और अंग्रेजों ने कानून के माध्यम से धर्मांतरण को बढ़ावा दिया।
आज भी यह प्रक्रिया अलग-अलग तरीकों से जारी है। उन्होंने कहा कि यदि इसे रोकना है तो कानूनों में बदलाव जरूरी है और नागरिकों को अपने सांसदों व विधायकों से नियमित संवाद करना चाहिए।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि हर साल बड़ी संख्या में परिवारों का धर्मांतरण हो रहा है और देश में डेमोग्राफी असंतुलन की स्थिति बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि यह रुझान नहीं रुका तो आने वाले वर्षों में गंभीर सामाजिक संकट खड़ा हो सकता है।
सिस्टम सुधार से ही बचेगा देश
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि किसी देश में सतयुग या कलयुग का निर्धारण वहां की व्यवस्था से होता है। जहां सिस्टम मजबूत होता है, वहां सामाजिक संतुलन बना रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की कई व्यवस्थाएं आज भी औपनिवेशिक सोच से संचालित हो रही हैं और संविधान की भावना के साथ न्याय नहीं हो रहा।

उन्होंने यह भी कहा कि संविधान धार्मिक आचरण की स्वतंत्रता देता है, लेकिन धर्मांतरण को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं देता। इसके बावजूद गलत व्याख्याओं के कारण कई समस्याएं उत्पन्न हुई हैं।
प्रबोध चंद्रोदय के ऐतिहासिक संदर्भ
विशिष्ट अतिथि डॉ. कन्हैया लाल अग्रवाल ने कहा कि “प्रबोध चंद्रोदय” ग्रंथ चंदेलकालीन साहित्य का महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसकी रचना कृष्ण मिश्र ने की थी। उन्होंने बताया कि यह ग्रंथ प्रतीकात्मक शैली में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक परिस्थितियों का वर्णन करता है। इसके कुछ दृश्य खजुराहो के लक्ष्मण मंदिर में भी अंकित हैं।
सेवा परमो धर्मः न्यास का मूल मंत्र
न्यास अध्यक्ष डॉ. राकेश मिश्र ने कहा कि पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास की स्थापना 2017 में सेवा और समाज सशक्तिकरण के उद्देश्य से की गई थी। न्यास द्वारा अब तक स्वास्थ्य शिविर, किसान सहायता, प्रतिभा सम्मान, मैराथन, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, माघ मेला और महाकुंभ में सेवा शिविर जैसे अनेक कार्य किए गए हैं। उन्होंने प्रयागराज में गंगा तट पर आयोजित होने वाले माघ मेले में सभी को सहभागिता का निमंत्रण भी दिया।
कार्यक्रम में रही प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम में विधायक ललिता यादव, पूर्व विधायक उमेश शुक्ला, पुष्पेंद्र नाथ पाठक, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंह, प्रो. एस.पी. जैन, डॉ. एम.पी.एन. खरे, डॉ. सुनील चौरसिया, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक, शिक्षक, छात्र-छात्राएं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और पत्रकार मौजूद रहे।