समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 25 फरवरी :जेपी नड्डा ने देश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए डिजिटल परिवर्तन को एक “क्रांति” करार देते हुए कहा है कि तकनीक के उपयोग से चिकित्सा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और सुलभ बनी है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण ने विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत दी है।
नड्डा ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि इस पहल के तहत मरीजों को एक विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य आईडी दी जा रही है, जिससे उनकी मेडिकल हिस्ट्री सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध रहती है। इससे डॉक्टरों को सही उपचार योजना बनाने में मदद मिलती है और अनावश्यक जांचों से बचाव होता है।
उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं के माध्यम से अब ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज भी बड़े शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श ले पा रहे हैं। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि यात्रा और अन्य खर्चों में भी कमी आई है। नड्डा के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इलाज की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है।
नड्डा ने यह भी कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड के कारण भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की संभावनाएँ कम हुई हैं। दवाओं की उपलब्धता, अस्पतालों में बेड की स्थिति और बीमा दावों की प्रक्रिया अब अधिक व्यवस्थित हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल सुविधा बढ़ाना नहीं, बल्कि गरीब और वंचित वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा भारत के लिए दीर्घकालिक लाभ का आधार बन सकता है। डेटा आधारित नीति निर्माण और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन स्वास्थ्य क्षेत्र को अधिक सक्षम बनाएगा। नड्डा ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक उदाहरण बनेगा।