समग्र समाचार सेवा
तमिलनाडु 2 मार्च : तमिलनाडु की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब तमिलिसाई सुंदरराजन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मदुरै दौरे के दौरान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अनुपस्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री ने इस दौरे के दौरान राज्य को लगभग 7,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएँ समर्पित कीं, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे से जुड़ी अहम परियोजनाएँ शामिल हैं।
पूर्व तेलंगाना राज्यपाल और भाजपा नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि तमिल संस्कृति अतिथि सत्कार की परंपरा को सर्वोपरि मानती है। उन्होंने कहा, “हमारे यहाँ अतिथि का स्वागत खुले दिल से किया जाता है। जब देश के प्रधानमंत्री राज्य में विकास योजनाएं समर्पित करने आए हैं, तो मुख्यमंत्री का स्वागत के लिए उपस्थित न होना तमिल संस्कृति के अनुरूप नहीं है।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री स्टालिन जानबूझकर कार्यक्रम से दूर रहे। उनके मुताबिक, “मुख्यमंत्री चेन्नई में मौजूद थे, लेकिन फिर भी प्रधानमंत्री का स्वागत करने नहीं आए। शायद वे इस तथ्य को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करना चाहते थे कि केंद्र सरकार तमिलनाडु के लिए बड़ी परियोजनाएं लेकर आई है।”
इस बीच, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी प्रधानमंत्री के मदुरै दौरे को लेकर उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए यह सम्मान की बात है कि प्रधानमंत्री चुनाव अभियान के तहत मदुरै आ रहे हैं। गोयल ने विश्वास जताया कि आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एनडीए को जीत मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मदुरै पहुंचकर प्रसिद्ध थिरुपरनकुंद्रम मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मंडेला नगर ग्राउंड्स में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान वे मंच पर एआईएडीएमके नेता एडप्पडी के पलानीस्वामी के साथ नजर आए, जो राज्य में एनडीए के प्रमुख सहयोगी हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु के बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, रेलवे परियोजनाओं और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इन परियोजनाओं से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है।
दूसरी ओर, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की ओर से इस मुद्दे पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव की राजनीति तेज हो सकती है।
प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब तमिलनाडु में चुनावी माहौल गर्म हो रहा है। एनडीए और विपक्षी दल दोनों ही जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सक्रिय हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति को लेकर उठा विवाद आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को और गरमा सकता है।