त्रिपुरा : सियासी घमासान सीपीआई(एम) दफ्तरों पर ‘बुलडोजर एक्शन’ की माँग

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पूनम शर्मा
रतन लाल नाथ ने त्रिपुरा की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। राज्य के संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) पर सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर कब्जे का आरोप लगाते हुए उनके कथित अवैध पार्टी कार्यालयों को बुलडोजर से गिराने की माँग  की है। इस बयान के बाद विधानसभा में माहौल गर्म हो गया। यह विवाद उस समय सामने आया जब श्यामल चक्रवर्ती ने विधानसभा में सिपाहीजला जिले के बॉक्सनगर क्षेत्र में सरकारी जमीन के कब्जे से जुड़ा सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर उठाए गए कदमों की जानकारी माँगी ।

मंत्री का आरोप: सीपीआई(एम) ने बड़े पैमाने पर जमीन कब्जाई

सवाल का जवाब देते हुए रतन लाल नाथ ने कहा कि राज्य सरकार अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और संबंधित मामलों में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट स्तर पर कदम उठाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीआई(एम) के शासनकाल में 100 कानी से अधिक सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था, जहाँ  रबर के बागान तक लगाए गए।

नाथ ने यह भी कहा कि यह कब्जा केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि दक्षिण से लेकर उत्तर त्रिपुरा तक फैला हुआ था। उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में न केवल सरकारी जमीन बल्कि निजी संपत्तियों पर भी कब्जा किया गया।

‘बुलडोजर एक्शन’ की माँग  ने बढ़ाया विवाद

रतन लाल नाथ ने अपने बयान में कहा कि ऐसे सभी अवैध पार्टी कार्यालयों को बुलडोजर से गिरा देना चाहिए। उनके इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया, क्योंकि हाल के वर्षों में ‘बुलडोजर कार्रवाई’ एक संवेदनशील और विवादित राजनीतिक प्रतीक बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने भी किया समर्थन

राज्य के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने भी मंत्री के बयान का समर्थन किया। उन्होंने गोमती जिले के अमरपुर का एक मामला सामने रखते हुए कहा कि वहाँ  एक सीपीआई(एम) कार्यालय 556 वर्ग फीट सरकारी खास जमीन पर अवैध रूप से बना हुआ था। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस मामले में 2018 में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट की अदालत में कार्रवाई शुरू हुई थी और बाद में जिला प्रशासन ने बेदखली का आदेश भी दिया। सीपीआई(एम) ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई।

विधानसभा में हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप

इस पूरे मुद्दे पर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। जहाँ  एक ओर सरकार अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इन आरोपों को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बता रहा है।

राजनीतिक संदेश और आगामी असर

यह मुद्दा आने वाले समय में त्रिपुरा की राजनीति को और गर्मा सकता है। ‘बुलडोजर एक्शन’ की माँग केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और क्या वास्तव में किसी बड़े स्तर पर कार्रवाई होती है या यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाता है।

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