पूनम शर्मा
असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के साथ ही राज्य की राजनीति एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। सभी 126 विधानसभा सीटों पर हुई इस प्रक्रिया के बाद कुल 789 उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए वैध घोषित किया गया है। यह आंकड़ा न केवल चुनावी प्रतिस्पर्धा की तीव्रता को दर्शाता है, बल्कि राज्य की बहुदलीय राजनीतिक संरचना और बढ़ती राजनीतिक भागीदारी का भी संकेत देता है।
नामांकन प्रक्रिया और आंकड़ों का महत्व
इस बार कुल 815 उम्मीदवारों ने 1,389 नामांकन पत्र दाखिल किए थे, जिनमें से 789 को वैध पाया गया। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में नामांकन तकनीकी या कानूनी कारणों से खारिज भी हुए। यह प्रक्रिया चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है, जिसे Election Commission of India द्वारा सख्ती से लागू किया जाता है।
नामांकन जांच 24 मार्च से शुरू होकर 26 मार्च तक चली। बारपेटा और ढेकियाजुली सीटों पर यह प्रक्रिया थोड़ी देर से पूरी हुई, लेकिन अंततः सभी सीटों पर उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट हो गई।
बारपेटा और ढेकियाजुली: स्थानीय स्तर पर बदले समीकरण
ढेकियाजुली में सभी 10 नामांकन पत्रों को मंजूरी मिलना इस बात का संकेत है कि वहां मुकाबला बहुकोणीय और कड़ा रहने वाला है। वहीं बारपेटा सीट पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जहां कांग्रेस उम्मीदवार महानंदा सरकार का नामांकन रद्द कर दिया गया। इससे वहां का चुनावी मुकाबला सीमित होकर त्रिकोणीय हो गया।
अब बारपेटा में असम गण परिषद (AGP) के दीपक कुमार दास का मुकाबला दो निर्दलीय उम्मीदवारों से होगा। यह स्थिति दिलचस्प है क्योंकि कांग्रेस की अनुपस्थिति से वोटों का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। यह सीट अब क्षेत्रीय बनाम निर्दलीय मुकाबले का केंद्र बन सकती है।
उम्मीदवारों की संख्या और चुनावी प्रतिस्पर्धा
789 उम्मीदवारों का मैदान में होना यह दर्शाता है कि चुनाव अत्यधिक प्रतिस्पर्धी होने वाला है। औसतन हर सीट पर 6 से अधिक उम्मीदवार हैं, जो मतदाताओं के सामने कई विकल्प प्रस्तुत करते हैं। हालांकि, अधिक उम्मीदवारों की मौजूदगी कई बार वोटों के बंटवारे का कारण भी बनती है, जिससे अप्रत्याशित परिणाम सामने आ सकते हैं।
विशेष रूप से निर्दलीय उम्मीदवारों की सक्रियता यह दिखाती है कि स्थानीय मुद्दे और व्यक्तिगत प्रभाव अब भी असम की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नाम वापसी की अंतिम तिथि और संभावित बदलाव
26 मार्च को नाम वापसी की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। अब तक तीन निर्दलीय उम्मीदवार अपने नाम वापस ले चुके हैं। यह संख्या और बढ़ सकती है, जिससे अंतिम उम्मीदवारों की सूची में बदलाव संभव है।
नाम वापसी के बाद ही स्पष्ट होगा कि असली मुकाबला किन-किन उम्मीदवारों के बीच होगा। कई बार रणनीतिक रूप से उम्मीदवार नाम वापस लेकर किसी खास पार्टी या उम्मीदवार को समर्थन देते हैं, जिससे चुनावी समीकरण अचानक बदल जाते हैं।
राजनीतिक दलों की रणनीति पर असर
नामांकन जांच के बाद राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने का मौका मिला है। अब पार्टियां उम्मीदवारों की ताकत, स्थानीय समीकरण और विरोधियों की स्थिति को देखते हुए प्रचार अभियान तेज करेंगी।
कांग्रेस के उम्मीदवार का नामांकन रद्द होना पार्टी के लिए झटका है, वहीं AGP के लिए यह अवसर बन सकता है। इसी तरह अन्य सीटों पर भी छोटे-छोटे बदलाव बड़े राजनीतिक प्रभाव डाल सकते हैं।
निष्कर्ष: चुनावी तस्वीर धीरे-धीरे स्पष्ट
नामांकन जांच पूरी होने के बाद असम विधानसभा चुनाव 2026 की तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो चुकी है। हालांकि अंतिम सूची नाम वापसी के बाद ही सामने आएगी, लेकिन मौजूदा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि इस बार चुनाव बहुकोणीय, प्रतिस्पर्धी और कई जगहों पर अप्रत्याशित हो सकता है।
अब सभी की नजरें अंतिम उम्मीदवार सूची और चुनाव प्रचार के अगले चरण पर हैं, जहां असली राजनीतिक लड़ाई शुरू होगी।